Aaj Ka Panchang-02 अगस्त, 2022 का शुभ मुहूर्त, राहु काल, ग्रह दशा व अन्य विशेषताएं

आज का खास – श्री नाग पंचमी आज, नाग की पूजा से खुलेगा भाग्य का पिटारा, बदलेगी किस्मत

संस्कृति
Aaj Ka Panchang

Aaj Ka Panchang: आज का खास – श्री नाग पंचमी आज, नाग की पूजा से खुलेगा भाग्य का पिटारा, बदलेगी किस्मत

आज का पंचांग

आज का अंग्रेजी दिनांक: 02.08.2022
श्रीसंवत् २०७९ शक: १९४४
ऋतु – वर्षा
हिन्दी माह : श्रावण
पक्ष: शुक्ल
तिथि : पंचमी
दिन : मंगलवार
नक्षत्र : उत्तराफाल्गुनी
योग : शिव
सूर्योदय : 05:25
सूर्यास्त : 06:35
सूर्य : कर्क राशि में।
चंद्रमा : कन्या राशि में।
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आज का दिशा शूल : उत्तर।
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आज का राहुकाल :
अपराह्न 3:00 से 4:30 बजे तक।
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आज का पर्व-त्यौहार व मुहूर्त: आज श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। आज श्रीनाग पंचमी और भौम व्रत है।
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आज का खास :

नाग की पूजा से खुलेगा भाग्य का पिटारा, बदलेगी किस्मत

नागपंचमी आज, वर्षों बाद बन रहे हैं शिव योग

आज श्री नाग पंचमी है। नागराज की पूजा-अर्चना और आराधना का त्योहार श्री नाग पंचमी पर इस बार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस वर्ष नागपंचमी पर शिव योग बन रहा है। लगभग 30 वर्षो बाद श्री नाग पंचमी पर बन रहे शिव योग में नागराज की पूजा और अर्चना काफी लाभप्रद होंगे। शिवयोग में नाग पूजा विशेष महत्व रखता है। नागराज भगवान भोलेनाथ के आभूषण हैं। आज के दिन भगवान शिव शंकर और नागराज की विधिवत पूजा अर्चना करने से जीवन में आरोग्यता आती है। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागराज का पूजन करने की परंपरा है। इस दिन शिव का रुद्राभिषेक पूजन और कालसर्प दोष का पूजन करना लाभप्रद होता है। नाग पंचमी पर नागराज की पूजा अर्चना करने से से कालसर्प दोष जनहित बाधाएं शांत होती हैं। नाग पंचमी के दिन लोहे के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस दिन लोहे के बर्तन में भोजन नहीं बनाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन कृषि कार्य भी नहीं करना चाहिए।

नाग पूजन में करें हल्दी का प्रयोग

नागपंचमी पर नागराज की पूजा में हल्दी का प्रयोग लाभदायक होता है। धूप, दीप, नैवेद्य, दूध, गुड़, धान का लावा के साथ हल्दी बुक्का भी चढ़ाना चाहिए। इस दिन कालसर्प दोष की शांति के लिए नागराज की पूजा और पार्थिव शिवलिंग का पूजा व दूध से अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है। जन्मकुंडली में राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह समावेश हो जाते हैं तब एक दोष बनता है। जिसे सर्पकाल दोष कहते हैं। कालसर्प राहु-केतु जनित दोष है। यह 12 प्रकार के होते हैं। राहू का मुख सर्प समान होने से इसको सर्प दोष कहते हैं। शांति के लिए इस दिन नाग की प्रतिमा का पूजन करना चाहिए।
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