नवरात्रि के नौवें दिन कीजिये मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र तथा आरती

आज नवरात्रि का नौवां दिन है, इस दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और रोग, शोक, एवं भय से मुक्ति मिलती है। मां सिद्धिदात्री की पूजन विधि :- इस दिन रोजाना की तरह सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ और सुंदर वस्त्र धारण करें। […]

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आज नवरात्रि का नौवां दिन है, इस दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और रोग, शोक, एवं भय से मुक्ति मिलती है।

मां सिद्धिदात्री की पूजन विधि :-

इस दिन रोजाना की तरह सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ और सुंदर वस्त्र धारण करें। सर्वप्रथम गणेश पूजन और कलश पूजन कर मां सिद्धिदात्री की पूजा प्रारंभ करें। माता को पंचामृत से स्नान करवाएं। फिर माता को नौ प्रकार के फूल, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, पान, सुपारी आदि अर्पित करें और माता को हलवा, पूड़ी व चने का भोग लगाएं। इसके बाद मां सिद्धिदात्री की कथा का पाठ करें और फिर अंत में आरती कर कन्या पूजन करें, नौ कन्याओं को माता का प्रसाद खिलाएं।

इन मंत्रों से मां सिद्धिदात्री का करें जाप:-

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।

ओम सिद्धिदात्र्यै नम:।

विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा:
स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरकिम्बयैतत्
का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।

सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्ति प्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तय:।।

नन्दगोप गृहे जाता योशोदा-गर्भ-सम्भवा।
ततस्तौ नाशयिष्यामि, विन्ध्याचल निवासिनी।।

या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

मां सिद्धिदात्री की आरती:-

जय सिद्धिदात्री मां, तू भक्तों की दाता।

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।

तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।

तू सब काज उसके करती है पूरे।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।

जो हैं तेरे दर का ही अंबे सवाली।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।

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