सड़क पर लगे वर्टिकल गार्डन तोड़ रहे दम

मेट्रो के खंभों पर, सड़क किनारे जगह जगह लगे रेलिंग पर ये वर्टिकल गार्डन (Vertical Garden) विकसित किए गए। शुरुआत में तो सबकुछ सही रहा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इन्हें उपेक्षित कर दिया गया है।

Delhi

Delhi: सड़क व आसपास का नजारा हरियाली से भरा रहे, इसके लिए दिल्ली में लोक निर्माण विभाग ने जगह जगह वर्टिकल गार्डन विकसित किए। मेट्रो के खंभों पर, सड़क किनारे जगह जगह लगे रेलिंग पर ये वर्टिकल गार्डन (Vertical Garden) विकसित किए गए। शुरुआत में तो सबकुछ सही रहा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इन्हें उपेक्षित कर दिया गया है। छोटे छोटे ट्रे पर विकसित हरियाली अब सूख चुकी है। अब इनकी उपयोगिता पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं।

अब केवल ढांचा

जनकपुरी डी ब्लॉक के पास फ्लाईओवर के नीचे लोक निर्माण विभाग ने वर्टिकल गार्डन करीब दो वर्ष पूर्व बनाए थे, लेकिन अब यहां वर्टिकल गार्डन के नाम पर केवल ढांचा ही नजर आता है। इसी तरह उत्तम नगर से जनकपुरी की ओर जाने के क्रम में तिलक पुल पर लोक निर्माण विभाग ने पंखा रोड नाले पर स्थित पुल की रेलिंग पर वर्टिकल गार्डन बनाया था, लेकिन अब यहां भी हरियाली नाममात्र की रह गई है। यहां यह हाल तब है जब इसे विकसित किए महज छह महीने ही हुए हैं। रिंग रोड की बात करें तो धौलाकुआं से साउथ एक्स जाने के क्रम में भी मेट्रो के खंभों पर कायम हरियाली अब सूखने की स्थिति में है।

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आखिर क्यों है ऐसा हाल

गर्मियों के मौसम में दरअसल सभी पौधों को पर्याप्त मात्रा में पानी चाहिए, लेकिन अभी उद्यान विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा वर्टिकल गार्डन की देखरेख में तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जिसका अभी लोक निर्माण विभाग के मालियों के पास सर्वथा अभाव है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्टिकल गार्डन लगाना तो आसान है, लेकिन इसकी देखरेख कर इसे कायम रखना मुश्किल कार्य है।

क्या कहते हैं लोग

जनकपुरी निवासी राकेश त्रेहन कहते हैं कि सरकार जिस जोश के साथ कोई योजना शुरू करती है, वह जोश कुछ ही दिनों तक कायम रहता है। वर्टिकल गार्डन एक अच्छी पहल थी, लेकिन देखरेख के अभाव में यह योजना अब कारगर साबित नहीं होती नजर आ रही है। बेहतर है हम जमीन पर ही पेड़ पौधे उगाएं। तिलक पुल के पास रहने वाले रोमी कुकरेजा कहते हैं कि तिलक पुल से गुजरते समय में अब जब भी कभी वर्टिकल गार्डन की ओर देखता हूं तो निराशा होती है। इसकी देखरेख नहीं होना एक गंभीर बात है। द्वारका निवासी बीके झा बताते हैं कि वर्टिकल गार्डन योजना दिल्ली जैसे शहरों के लिए उपयुक्त ही नहीं थी। यह ऐसी जगहों के लिए जहां सड़कें कम चौड़ी हों और जहां सड़क पर सेंट्रल वर्ज नहीं हो। दिल्ली में ऐसा नहीं है। यहां सेंट्रल वर्ज पर ही हरियाली विकसित होनी चाहिए।

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