मानसून आने पर किया जा रहा है हाइवे की जल निकासी का इंतजाम

एनएचएआइ द्वारा अब पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलभराव वाले स्थानों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जा रहे हैं, लेकिन यह कितना कामयाब होंगे, यह समय बताएगा।

Faridabad

Faridabad: एनएचएआइए भी नगर निगम की राह पर चल रहा है। बरसात के मौसम में हाइवे पर जगह जगह पानी भरने की समस्या काफी पुरानी है, लेकिन एनएचएआइए ने आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया। एनएचएआइ का निर्माण हुए करीब छह साल से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी एनएचएआइ के अधिकारियों ने जलभराव की समस्या का समाधान करने की जरूरत महसूस नहीं की। इस दौरान टोल कंपनी वाहन चालकों से लगातार करोड़ों रुपए का टैक्स वसूल चुकी है, लेकिन कंपनी ने वाहन चालकों की समस्या की तरफ कभी ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं की।

अब टोल कंपनी और एनएचएआइ ने ध्यान दिया भी तो ऐन उस समय, जब मानसून बिल्कुल सिर पर है। एनएचएआइ द्वारा अब पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलभराव वाले स्थानों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जा रहे हैं, लेकिन यह कितना कामयाब होंगे, यह समय बताएगा। फिलहाल हाइवे से गुजरने वाले लाखों लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं हाइवे पर बने गड्ढे बरसाती पानी भरने से जानलेवा हो गए है। इन गड्ढों की वजह से वाहन चालक आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह जगह बरसाती पानी भरने से यातायात पुलिस को व्यवस्था बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है ।

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आग लगने पर खोद रहे हैं कुंआ

सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण जिले में हुए करीब छह साल से ज्यादा समय गुजर चुका है। निर्माण के दौरान टोल कंपनी और एनएचएआइ द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग में कई तरह की खामियां शुरू से ही दिखाई देनी शुरू हो गई थी। वैसे तो निर्माण के दौरान कई तरह की खामियां छोड़ी गई हैं, लेकिन सडक़ निर्माण के दौरान लेबल का ध्यान न दिये जाने से कई स्थानों पर बरसात के दौरान पानी भर जाता है और कई कई दिनों तक पानी ठहरा रहता है।

जल भराव के कारण हर साल वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव होते ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुरी तरह जाम लगने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। बरसात के मौसम में एनएचएआइ द्वारा हर साल रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के दावे किये जाते रहे हैं, लेकिन कभी काम नहीं किया गया। इस साल अब बरसात का मौसम शुरू होने पर एनएचएआइ ने जलभराव वाले स्थानों पर रेन वॉटर हार्र्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का काम शुरू किया है। सम्भव है, इस साल भी लोगों को समस्या झेलनी पड़ सकती है।

जानलेवा हो रहे सडक़ के गड्ढे

शहर की सडक़ों पर जगह जगह बने गड्ढों के कारण आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में जहां लोगों की जान जा रही है, वहीं काफी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल भी हो रहे हैं। इसके बावजूद एनएचएआइ व नगर निगम राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास बने गड्ढों की तरफ ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन पर कई जगह खतरनाक गड्ढे बने हुए हैं। जिसमें सबसे ज्यादा बुरी स्थित बल्लभगढ़ फ्लाइओवर के आसपास बनी हुई है। बल्लभगढ़ सोहन पुल से उतर कर हाइवे की सर्विस लेन की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां सडक़ पर जगह जगह गहरे गहरे गड्ढे बने हुए हैं। ऐसे में बरसात का पानी भर जाने से इन गड्ढों में फंस कर अक्सर दो पहिया वाहन चालक घायल हो रहे हैं। इसी तरह बाटा फ्लाइओवर के साथ साथ अन्य कई स्थानों पर गड्ढे बने हुए हैं। ऐसा नहीं है कि एनएचएआइ के अधिकारियों को इस बारे में पता नहीं है। लेकिन सबकुछ जानने के बाद भी सडक़ की मरम्मत करवाना तो दूर गड्ढों को भरा भी नहीं जाता है।

बरसात में होती है परेशानी

सडक़ सुरक्षा संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष एसके शर्मा का कहना है कि बरसात के दिनों में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करना बेहद मुश्किल हो जाता है। सडक़ पर पानी भर जाने से वाहन चलाने में दिक्कत होती है। इसके अलावा पानी भर जाने से सडक़ पर जाम की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। खासकर शहर को हाइवे से जोडऩे वाले चौराहों पर जाम की समस्या ज्यादा होती है। जल निकासी की व्यवस्था शीघ्र करनी चाहिए।

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