हरियाणा की शान बड़खल झील को गुलजार करने में हो रही लापरवाही

बड़खल झील का बांध करीब दो दशक पहले तक बेहद खूबसूरत दिखाई देता था। जिसके कारण बड़े नेताओं और फिल्म अभिनेता आए दिन झील की तरफ खिंचे चले आते थे।

Faridabad

Faridabad: अरावली की पहाड़ियों पर स्थित बड़खल झील (Badkhal Lake) जहां हरियाणा की शान थी, वहीं दिल्ली और एनसीआर के पर्यटकों की पहली पसंद भी थी। अवैध खनन और अरावली पर्वत के साथ लगातार की गई छेड़छाड़ की वजह से करीब 18 साल पहले बड़खल झील पूरी तरह सूख गई थी। जिसके बाद कई सालों तक सरकारों ने झील की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। करीब दस साल पहले बड़खल झील को गुलजार करने की आवाज उठने पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ध्यान तो दिया, लेकिन यह योजना कागजों तक ही सीमित रही। वर्ष 2014 में विधायक सीमा त्रिखा के प्रयासों के बाद भाजपा सरकार ने बड़खल झील को गुलजार करने की योजना बनाई। लंबे समय बाद वर्ष 2019 में सरकार ने झील को पानी से भरने के लिए एसटीपी का निर्माण सेक्टर 21ए में शुरू करवाया।  एसटीपी का निर्माण अगस्त 2020 में पूरा होना था, लेकिन निर्माण कार्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। इससे लोगों को संदेह है कि झील को गुलजार करने का सपना कहीं सपना ही न रह जाए। वहीं यदि एसटीपी खराब होने पर गंदा पानी झील में छोड़ा गया तो भूजल जहरीला हो सकता है। इससे पहले भी एसटीपी खराब होने पर नहरों में गंदा पानी छोड़ने के मामले सामने आ चुके हैं।

जर्जर बांध का जीर्णोद्वार नहीं

बड़खल झील का बांध करीब दो दशक पहले तक बेहद खूबसूरत दिखाई देता था। जिसके कारण बड़े नेताओं और फिल्म अभिनेता आए दिन झील की तरफ खिंचे चले आते थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सदा बहार हीरो देवानंद के पसंदीदा पर्यटन स्थलों में बड़खल झील शामिल था। जिस समय बड़खल झील गुलजार था, उस समय यहां कई प्रसिद्ध फिल्मों की शूटिंग तक होती थी। लेकिन अरावली की पहाडिय़ों में खनन और अवैध जल दोहन के कारण शहर का जलस्तर लगातार गिरता चला गया। जिसके कारण प्रदेश के प्रसिद्ध पयर्टन स्थलों में शामिल बड़खल झील समय के साथ सूखती चली गई। झील सूखने के बाद पयर्टन निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी झील की तरफ ध्यान देना बंद कर दिया। अब हालत यह है कि झील में कीकर का जंगल उग आया है। बाकी बचे खाली मैदान में बच्चों ने खेलने के लिए फुटबॉल ग्राउंड बना लिया है। बांध बुरी तरह टूट फूट कर उजाड़ होता चला जा रहा है। झील को गुलजार करने में बांध का जीर्णोद्वार भी शामिल है, लेकिन स्मार्ट सिटी की तरफ से इसका काम शुरू नहीं किया गया है।

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इस साल नहीं होगा गुलजार

भूजल स्तर गिरने से बड़खल झील सूखी है। ऐसे में बड़खल झील बरसात का सारा पानी सोख लेती है। सरकार ने योजना बनाई है कि आगरा नहर से पाइप लाइन के जरिये पानी बड़खल झील में परसोन मंदिर की तरफ से डाला जाएगा। जिससे यह देखा जा सकेगा कि झील किस स्तर तक पानी सोंख पाती है। इसी कड़ी में सेक्टर 21ए के पास करोड़ों रुपये की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। इस एसटीपी के जरिये शहर के सीवर के पानी को साफ करके नियमित रूप से बड़खल झील में डाला जाता रहेगा। इससे पहले सीवर के पानी को बादशाहपुर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए यमुनानदी के डाला जाता है। इसके अलावा पानी के उन स्त्रोतों को भी खोला जाएगा। जिनके जरिए पहले झील में पानी आता था। पानी को रोकने के लिए कुछ बांध और अन्य कई तरह के उपाय करने की योजना बनाई गई है। जिसके लिए दरारों को भरने के साथ साथ मोटी दीवार भी लगाई जाएगी, लेकिन संबंधित अधिकारियों की लापरवाही से बड़खल झील का गुलजार करने के यह सभी जरूरी काम अधूरे पड़े हैं।

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