फरीदाबाद में स्वास्थ्य के लिए बनाए पार्क भी दुर्दशा का शिकार

इन इलाकों के लोगों को सुबह शाम सडक़ों और खाली पड़ी जमीनों पर जाकर सैर करनी पड़ती हैं। इलाके के लोग लंबे समय से यहां पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं।

Faridabad

Faridabad: नगर निगम के अधिकारियों के लाख दावों के बाद भी शहर के लोगों को स्वच्छ माहौल नहीं मिल पाया। निगम केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के नारे को भी बेमानी साबित करने पर तुला है। लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने जगह जगह ओपन जिम और पार्को का निर्माण करवाने के दावें किए थे। शहर के एनआईटी (NIT) इलाके में पिछले पांच सालों के दौरान कहीं भी ओपन जिम नहीं बनाया गया। नए पार्को के निर्माण की बात तो दूर, निगम पहले से मौजूद पार्को की सही तरीके से देख रेख भी नहीं कर पा रही है। जिसके कारण इलाके के पार्क बुरी तरह से दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा एनआईटी की कई घनी आबादी वाली कॉलोनियों में तो निगम ने आज तक पार्क बनाने की योजना तक नहीं बनाई। जिससे इन इलाकों के लोगों को सुबह शाम सडक़ों और खाली पड़ी जमीनों पर जाकर सैर करनी पड़ती हैं। इलाके के लोग लंबे समय से यहां पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं।

रोज गार्डन की हालत खस्ता

एनआईटी के निवासियों के लिए करीब 25 साल पहले तत्कालीन सरकार ने दशहरा ग्राउंड के निकट भव्य रोज गार्डन बनवाया था। पार्क की खूबसरती बढ़ाने के लिए जहां विभिन्न तरह के फूलों के पौधे लगाने के साथ ही म्यूज़िकल फव्ववारे भी लगाए थे। बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न तरह के झूले और जीव जंतुओं को रखने के लिए एक मिनी चिडिय़ा घर भी तैयार किया गया था। इन खूबियों की वजह से रोज गार्डन को शहर का दिल कहा जाता था। शुरू में इस पार्क की ठीक से देखरेख की जाती थी, लेकिन पिछले करीब एक दशक से ज्यादा समय से पार्क की देखरेख के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है। जिसके कारण अब यह पार्क बुरी तरह से दुर्दशा का शिकार हो चुका है। पार्क में लगे म्यूज़िकल फव्ववारे बुरी तरह टूट फूट चुके है। पार्क के एक हिस्से में गंदगी का ढेर लगा रहता है। बच्चों के लिए लगाए गए ज्यादातर झूले जर्जर होकर टूटने के कगार पर पहुंच गए हैं। देखरेख के अभाव में पौधे तो नष्ट हो ही गए हैं साथ घास भी लगातार खराब होती जा रही है।

एनआईटी 86 के बेहाल पार्क

एनआईटी 86 विधानसभा क्षेत्र में कई घनी आवादी वाली कॉलोनियां आती हैं। जिनमें जवाहर कॉलोनी, पर्वतीय कालोनी, संजय कॉलोनी, डबुआ कालोनी, जवाहर कॉलोनी भाग दो, कपड़ा कॉलोनी और नंगला एन्कलेव समेत दर्जनभर अन्य छोटी बड़ी कॉलोनियां शामिल है। इन कॉलोनियों को बसे करीब 40 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन किसी भी सरकार ने यहां के लोगों के लिए पार्क बनाने की योजना नहीं बनाई। इस इलाके से वर्ष 2009 में विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद मंत्री बने स्वर्गीय शिवचरण लाल शर्मा ने लोगों की पीड़ा समझी थी। उन्होंने सबसे पहले प्याली फैक्ट्री चौक पर एक खूबसूरत पार्क का निर्माण करवाया, लेकिन इलाके की आबादी के हिसाब से यह पार्क ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा था। जिसके कारण उन्होंने अपने कार्यकाल में डबुआ सब्जी मंडी के पास लेजरवैली पार्क का निर्माण भी करवाया। यह दोनों पार्क भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। नगर निगम की लापरवाही के कारण अब इन दोनों ही पार्को की हालत खस्ता हो चुकी है।

खाली जगह पर करते हैं सैर

एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के यह दोनों ही पार्क जवाहर कॉलोनी, पर्वतीया कॉलोनी, संजय कॉलोनी और अन्य कई कॉलोनियों से काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में युवा तो इन पार्को में सैर करने के लिए चले जाते हैं, लेकिन बुजुर्गो महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी होती है। ऐसा नहीं है कि इन इलाकों में पार्क के लिए जगह उपलब्ध नहीं है। यहां ऐसी कई जगह है जहां पर पार्क विकसित किए जा सकते हैं। पर्वतीय कालोनी के जलघर में पार्क के लिए काफी जगह है। सैंकड़ों लोग यहां सुबह शाम सैर के लिए आते हैं। यदि यहां पार्क विकसित कर दिया जाए तो लोगों को फायदा हो सकता है। इसी तरह ओल्ड प्रैस कालोनी के काफी बड़े हिस्से में स्थित जी ब्लॉक के सभी सरकारी क्वार्टर खाली हो चुके है। यहां भी सुबह शाम इलाके के सैंकड़ों लोग सैर के लिए आते हैं। यहां भी पार्क विकसित किया जा सकता है।

स्वास्थ्य के लिए जरूरी

समाजसेवी किशन कुमार का कहना है कि प्रदूषण को कम करने और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पार्क विकसित करना बेहद जरूरी है, लेकिन इस इलाके में पार्क बनाने की जरूरत महसूस न होने से लोगों को परेशानी होती हैं। पर्वतीय कालोनी के जलघर में हर रोज सैंकड़ों लोग सैर के लिए जाते है। ऐसे में यदि यहां पार्क विकसित कर दिया जाए तो इलाके के बुजुर्गो और महिलाओं को सुविधा हो जाएगी। एनआइटी इलाके में पार्क का काफी अभाव है। जिसके कारण यहां के अनेक लोग सेक्टर 52 में सैर करने के लिए जाते हैं। यदि सेक्टर 52 में हरियाली कर दी जाए तो लोगों को आसानी होगी।

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