धूल फाँक रहे रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, व्यर्थ हो रहा बरसाती पानी

नगर निगम की लापरवाही से जरा सी बरसात आते ही शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती है। पिछले दिनों थोड़ी देर के लिए आई बरसात से एनआईटी के कई इलाकों में पानी भर गया।

Faridabad

Faridabad: नगर निगम की लापरवाही से जरा सी बरसात आते ही शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती है। पिछले दिनों थोड़ी देर के लिए आई बरसात से एनआईटी के कई इलाकों में पानी भर गया। बरसाती पानी जमीन को रिचार्ज करने की बजाए नालियों और सीवर में जा रहा है। जबकि बरसाती पानी से जमीन को रिचार्ज करने के लिए शहर में करोड़ों रुपये की लगात से बनाए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग धूल फांक रहे हैं। करीब आठ साल पहले इनमें से ज्यादातर रेन वॉटर हर्वेस्टिंग सिस्टम गलत तरीके से बनाए गए थे। शेष रख रखाव के अभाव में खराब हो चुके हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में बरसात से होने वाले जल भराव की वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

दस साल पहले बने थे सिस्टम

अवैध जल दोहन और अन्य कई कारणों से शहर का भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसके अलावा नगर निगम द्वारा लापरवाही से बनाई गई सड़कों और नालियों की वजह से बरसाती जमीन जरा भी जमीन के भीतर नहीं जा पाता। बरसात आने पर पानी सड़कों पर
बहता रहता है। इन कारणों से फरीदाबाद डार्क जोन में शामिल हो चुका है। शहर के भूजल में सुधार लाने के लिए जेएनएनयूआरएम (जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन) के तहत वर्ष 2012 में शहर के विभिन्न स्थानों में तीन करोड़ रुपये की लागत से 181 रेन वॉटर
हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए थे। इन्हें बनाने का ठेका एनबीसी कंपनी को दिया गया था। इनमें से कुछ सिस्टम जो नगर निगम के पार्क आदी में बनाए गए थे। वे आरडब्ल्यु और स्थानीय लोगों की देखरेख की वजह से चल रहे है।

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गलत तरीके से बने सिस्टम

जेनएनएनयूआरएम के तहत बनाए गए 181 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों में से ज्यादातर शुरू से ही काम नहीं कर रहे हैं। पानी को हार्वेस्टिंग सिस्टम में डालने के लिए निर्माण के दौरान कंपनी द्वारा कनेक्टिविटी नहीं की गई थी। इसके अलावा कुछ सिस्टम जमीन के लेबल से काफी ऊंचे बनाए गए है। जिस तरफ पानी का ढलान होता है, कुछ सिस्टम उनकी विपरित दिशा में बनाए गए है। इसके अलावा कुछ सिस्टम ऐसी जगह पर बनाए गए हैं, जहां इनकी जरूरत ही नहीं थी। जबकि वास्तव में सिस्टम लगाने के लिए पहले जगह का चयन करना होता है। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पार्क, सरकारी इमारत, कम्युनिटी सेंटर और अन्य ऐसी जगह पर लगाया जाता है, जहां पानी साफ रहता है और बरसात आने पर ज्यादा मात्रा में इकट्ठा होता। निगम द्वारा बनाए गए ज्यादातर सिस्टमों में पानी जाने के लिए नालियां तक नहीं बनाई गई। सही कनेक्टिविटी न होने से ज्यादातर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहे है।

यहां धूल फांक रहे हैं  सिस्टम

सेक्टर-25 में दो हार्वेस्टिंग, संजय कालोनी, पर्वतीय कालोनी, एनएच-3 ट्यूबवेल नंबर-8 के पास, बाल भवन फरीदाबाद, एनबीसीसी ऑफिस में, रोज गार्डन एनआईटी, फायर स्टेशन नीलम बाटा रोड, सेक्टर-24 में बूस्टिंग स्टेशन के पास तीन हार्वेस्टिंग, सेक्टर-24 फीसा पार्क, सेक्टर-7, सेक्टर-8 पार्क, सेक्टर-8 मिडिल स्कूल। फायर स्टेशन ऑफिस सेक्टर 15, सेक्टर-37 मंदिर के पीछे, सेक्टर-37 नगर निगम कार्यालय, सेक्टर-37 मॉडर्न स्कूल, सेक्टर-15 पार्क, गांधी भवन, निगम कार्यालय बल्लभगढ़, निगम कार्यालय बल्लभगढ़ के पास, थाना सदर व शहर बल्लभगढ़, एसडीएम निवास बल्लभगढ़, शिव कॉलोनी तिगांव रोड, तिगांव रोड सेक्टर-3 डिस्पोजल के पास, डबुआ अनाज मंडी के पीछे पॉइंट 1,2,3 4 के पास, डबुआ अनाज मंडी के पास बने लेबर क्वॉर्टर में तीन हार्वेस्टिंग,  सेक्टर-16,9,15,10,16 जेड पार्क, सेक्टर-16 पार्क, सेक्टर-16 हूवो अपार्टमेंट में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए थे।

व्यर्थ हो रहा पानी

सामाजिक कार्यकर्ता किशन कुमार का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही से बरसात आने पर लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इससे शहर का भूजल स्तर तो गिर ही रहा है। साथ ही सडक़ों पर बरसाती पानी जमा होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। जल भराव के कारण सबसे ज्यादा एनआईटी इलाका प्रभावित होता है।

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