एचएसवीपी की लापरवाही से स्लम से बदतर हालत में हैं सेक्टर 56

एचएसवीपी से इस सेक्टर में प्लॉट खरीदने के बाद हजारों लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि एचएसवीपी द्वारा प्लॉट मालिकों से शुल्क तो पूरा ले लिया, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ उपलब्ध करवाने की जरूरत महसूस नहीं की।

Faridabad

Faridabad: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए वर्षों पहले सेक्टर 55 के निकट सेक्टर 56 और 56ए विकसित किया था। प्लॉट काटने के बाद एचएसवीपी ने वर्ष 2006 में प्लॉट मालिकों को कब्जा दे दिया था। इस दौरान प्लॉट मालिक विभिन्न मदों के तहत एचएसवीपी के पास करोड़ों रुपये जमा करवा चुके हैं। यहां तक कि इन्हसमेंट का पैसा भी सेक्टरवासी भर रहे हैं। एचएसवीपी से इस सेक्टर में प्लॉट खरीदने के बाद हजारों लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि एचएसवीपी द्वारा प्लॉट मालिकों से शुल्क तो पूरा ले लिया, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ उपलब्ध करवाने की जरूरत महसूस नहीं की। दोनों सेक्टर में करीब 30 प्रतिशत प्लॉटों पर लोगों ने मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया। सुविधाओं के अभाव में यह लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं।

ये भी पढ़ें:75 दिवसीय मेगा इवेंट के तहत सप्ताह के अंत में होंगे बड़े कार्यक्रम

16 वर्षो में भी नहीं दी सुविधा

एचएसवीपी ने सेक्टर 55 के पीछे प्रतापगढ़ और समयपुर के पास वर्षों पहले सेक्टर 56 और 56ए को विकसित किया था। उस दौरान एचएसवीपी के अधिकारियों ने लोगों को लुभाने के लिए सेक्टर में दिखावे की सडक़ों और सीवर लाइन का निर्माण करवा कर बिजली के पोल लगवा कर प्लॉट काट दिये थे। सेक्टर नाम आते ही लोगों ने झांसे में आकर प्लॉट खरीदने शुरू कर दिये थे। एचएसवीपी ने वर्ष 2006 में प्लॉट धारकों को कब्जा भी दे दिया था, लेकिन इसके बाद एचएसवीपी ने विकास के नाम पर एक ईंट तक लगाने की जरूरत महसूस नहीं की। समय गुजरने के साथ ही सड़कें टूटने लगी। अब सड़कों का सिर्फ निशान ही शेष है। मेनहॉल से ढक्कन गायब होने से लाइने चौक हो चुकी है। ऐसे में सीवर का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों और खाली प्लॉटों में बहता रहता है। जगह जगह सीवर का गंदा पानी भरा होने से यहां मच्छरों का भी भारी प्रकोप है। एचएसवीपी के अधिकारियों की लापरवाही से सेक्टर स्लम बस्ती में तब्दील हो चुका है।

आवश्यक सुविधाओं का अभाव

एचएसवीपी द्वारा सेक्टर 56 और 56ए 220 एकड़ जमीन में बसाया गया है। सेक्टर 56 में छोटे बड़े करीब 3600 प्लॉट काटे गए हैं और इससे कुछ कम प्लॉट सेक्टर
56ए में हैं। इसके अलावा यहां 11 हाउसिंग ग्रुप सोसायटी की साइट भी छोड़ी गई है। जिनमें से कुछ सोसायटियों का निर्माण भी चल रहा है। एचएसवीपी ने सेक्टर को बसाते समय इसके नक्शे में सभी तरह की सुविधाएं दर्शाई थी। सेक्टर के नक्शे में मार्केट और बूथों की संख्या, अस्पताल और क्लीनिक, स्कूल, क्रेच, दर्जनों की संख्या में पार्क, सड़कों के किनारे ग्रीनबेल्ट, धार्मिक स्थल, बिजली सब स्टेशन, सीवरेज वॉटर डिस्पोजल पंप और अन्य कई तरह की सुविधाएं दर्शाई गई है।

सब स्टेशन की साइट हुई गायब

सेक्टर 56 और 56ए को विकसित करते समय एचएसवीपी ने यहां प्लॉट खरीदने वाले लोगों को सेक्टर के लिए अलग बिजली सबस्टेशन लगाकर देने का वायदा किया था। बिजली सब स्टेशन की साइट भी सेक्टर के नक्शे में दर्शाई गई है, लेकिन इतने वर्षो के दौरान एचएसवीपी ने यहां बिजली सबस्टेशन तैयार करवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किये। बल्कि बिजली सब स्टेशन के लिए छोड़ी गई जमीन पर एचएसवीपी के अधिकारियों ने श्मशानघाट और कब्रिस्तान बनाने की अनुमति दे दी, जो बन भी चुका है। सब स्टेशन न होने के कारण सेक्टर के लोगों को प्रतापगढ़ फीडर से बिजली की आपूर्ति लेनी पड़ रही है। इसी तरह एचएसवीपी के अधिकारियों ने में सेक्टर में सीवर की पाइप लाइन तो बिछा दी, लेकिन सीवर के गंदे पानी के निस्तारण को डिस्पोजल पंप का निर्माण करवाने की जरूरत महसूस नहीं की। वहीं लापरवाही के कारण मेनहॉल के ढक्कन भी गायब हो चुके हैं। मेनहॉल में कूड़ा और मलवा गिरने से लाइन जाम हो चुकी है। जिसके कारण सीवर का गंदा पानी लाइनों में घूम फिर कर ओवरफ्लो होकर सेक्टर के खाली प्लॉटों में भरा हुआ रहता है।

लोगों के साथ धोखा

समाजसेवी गुरमीत सिंह देओल का कहना है कि सेक्टर 56 और 56ए को बसाने से पहले एचएसवीपी के अधिकारियों ने लोगों को लुभाने के लिए कई तरह के सपने दिखाए थे। सेक्टर के नक्शे में आवश्यक सुविधाओं के लिए जो साइटें दर्शाई गई थी। वह सभी साइटें खाली पड़ी हुई है। सेक्टर में लोग बिजली, पानी और सीवर जाम की समस्या से पहले ही परेशान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.