ज़रूरी पीरियड्स हैं, पीरियड्स का दर्द नहीं!

पीरियड्स (मासिक धर्म) किसी भी महिला के लिए एक ऐसे अतिथि की तरह है, जो हर महीने दरवाज़े पर दस्तक देने लगते हैं, कई बार पांच दिनों के लंबे प्रवास के लिए या कई बार इससे भी ज्यादा दिनों के लिए। पीरियड्स तो अच्छे हैं, लेकिन इसकी जो बुरी बात है, वह है, पीरियड्स के […]

सेहत

पीरियड्स (मासिक धर्म) किसी भी महिला के लिए एक ऐसे अतिथि की तरह है, जो हर महीने दरवाज़े पर दस्तक देने लगते हैं, कई बार पांच दिनों के लंबे प्रवास के लिए या कई बार इससे भी ज्यादा दिनों के लिए। पीरियड्स तो अच्छे हैं, लेकिन इसकी जो बुरी बात है, वह है, पीरियड्स के साथ लगातार होने वाली ऐंठन या पेट अथवा कमर दर्द। इसके कारण कई बार बिस्तर से उठना तक मुश्किल हो जाता है। इस अनचाहे दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप चाहें तो योग की मदद ले सकती हैं। योग के कई ऐसे आसन हैं, जो पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द में काफी राहत दिला सकते हैं। फिर देर किस बात की है, आइए जानते हैं, योग के कुछ ऐसे आसन, जो पीरियड्स के दौरान भी आपकी ज़िंदगी की रफ़्तार को थमने नहीं देंगे।

बद्ध कोणासन (Baddha Konasana)

जब पीरियड्स के दौरान ऐंठन, दर्द और पेट से जुड़ी समस्याओं की बात आती है तो बद्ध कोणासन एक कारगर उपाय साबित हो सकता है। इस आसन को लगातार करने से यह न सिर्फ़ पाचन शक्ति को सुधारता है, बल्कि माहवारी के दौरान होने वाले दर्द में भी राहत देता है। बद्ध कोणासन अंडाशय और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद कारगर है।

सुप्त बद्ध कोणासन (Supta Baddha Konasana)

सुप्त बद्ध कोणासन की मदद से महिलाएं पीएमएस के लक्षण जैसे- लंबी थकान, अनिद्रा, तनाव और सिर दर्द से छुटकारा पा सकती हैं। यह आसन पेट की मांसपेशियों को आराम देता है। सुप्त बद्ध कोणासन करने के दौरान जब इस आसन की मुद्रा में झुकते हैं तो यह मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में भी राहत प्रदान करता है।

बालासन (Balasana)

अगर आपको मासिक धर्म के दौरान मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है तो बालासन आपके लिए एक कारगर उपाय के रूप में काम कर सकता है। इस आसन की मदद से एक ओर आप अपने प्रजनन अंगों को आराम दे सकती हैं, वहीं दूसरी ओर पीठ, कंधों और गर्दन में होने वाले तनाव को भी कम कर सकती हैं।

उपविष्ठ कोणासन (Upavistha Konasana)

जब मन शांत करने की बात आती है तो उपविष्ट कोणासन सबसे अच्छे विकल्प के तौर पर माना जाता है। उपविष्ट आसन को आप पीरियड्स के दौरान भी कर सकती हैं। इस योगासन की मदद से मांसपेशियों में होने वाले ऐंठन और तनाव से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

भारद्वाजासन (Bharadvaja)

 

भारद्वाजासन मासिक धर्म के दौरान होने वाली ऐंठन और दर्द में काम करने वाले सबसे प्रभावी आसनों में से एक है। भारद्वाजासन एक बहुत सरल आसन है। यह आसन पीरियड्स के दौरान महिलाओं में रक्त प्रवाह को बेहतर तरीके से संचारित करता है।

विपरीत करनी आसन (Viparita Karani)

विपरीत करनी आसन न सिर्फ रक्त के परिसंचरण में सुधार करता है, बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा दिलाता है। विपरीत करनी आसन की मदद से रक्तचाप को सही बनाया रखा जा सकता है। यह आसन महिलाओं के तंत्रिका तंत्र को भी आराम देता है। इस आसन की मदद से महिलाएं पीरियड्स के दौरान होने वाले तनाव से भी छुटकारा पा सकती हैं, जो कि इन दिनों में होने वाली एक बहुत ही आम समस्या है।

जानुशीर्षासन (Janu Sirsasana)

जानुशीर्षासन पेट और प्रजनन की मांसपेशियों पर बहुत सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस आसन के दौरान सिर से लेकर घुटने तक आगे की ओर झुकना होता है, जो कि आपके पाचन तंत्र और प्रजनन अंगों को मज़बूती प्रदान करता है। जानुशीर्षासन न सिर्फ़ आपके अशांत दिमाग को शांत करता है, बल्कि मासिक धर्म के दौरान सिर और पेट के दर्द में भी राहत प्रदान करता है।

इन आसनों के नियमित अभ्यास से आप ने केवल माहवारी के दिनों की समस्याओं का आसान समाधान पा सकती हैं, बल्कि अपनी रोज़मर्रा के जीवन में भी अपने स्वास्थ्य को बेहतर कर सकती हैं। नियमित योगाभ्यास सिर्फ़ तन-मन को ऊर्जा ही नहीं देता, बल्कि यह आपकी कार्यक्षमता को भी कई गुना बढ़ा देता है।

आप भी योग अपनाइए और अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी को सहज बनाइए।

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