अभ्यंग के ये फ़ायदे जानकर हैरान रह जाएंगे आप!

आप बहुत बड़ी ग़लती पर हैं, अगर आप भी ऐसा सोचते हैं कि अभ्यंग सिर्फ़ एक तेल मालिश है। वैसे अभ्यंग को अभ्यंगम के नाम से भी जाना जाता है। इसमें तेल मालिश का विशेष महत्त्व है, लेकिन इसे केवल इतने तक ही सीमित समझना ग़लत है, क्योंकि इसके सदाबहार फ़ायदों में बेहतरीन सेहत और […]

सेहत

आप बहुत बड़ी ग़लती पर हैं, अगर आप भी ऐसा सोचते हैं कि अभ्यंग सिर्फ़ एक तेल मालिश है। वैसे अभ्यंग को अभ्यंगम के नाम से भी जाना जाता है। इसमें तेल मालिश का विशेष महत्त्व है, लेकिन इसे केवल इतने तक ही सीमित समझना ग़लत है, क्योंकि इसके सदाबहार फ़ायदों में बेहतरीन सेहत और सुंदरता की कुंजी छिपी हैं। यूं भी अगर सेहत अच्छी है तो सुंदरता भी निखरी-निखरी ही रहेगी। फिर भी सर्दियों में तो इसके फ़ायदों की कोई गिनती ही नहीं है। फिर भी अभ्यंग से जुड़े कुछ ख़ास फ़ायदों के बारे में हम यहां आपको बता रहे हैं। इन्हें जानने के बाद आप भी एक बार अभ्यंग करवा कर तो देखिए, आप भी इसके कायल न हो जाएं तो कहिएगा।

क्या है अभ्यंग

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अभ्यंग एक प्रकार की तेल मालिश है, लेकिन आम तेल मालिश के विपरीत इसमें तेल की मात्रा बहुत अधिक होती है। ये मात्रा इतनी ज़्यादा होती है कि सिर से लेकर पूरा शरीर ही इससे एक प्रकार से भीग जाता है। साथ ही इसमें मालिश के लिए जो तेल प्रयोग किया जाता है, वह गुनगुने से थोड़ा ज़्यादा गर्म होता है। इसके अलावा सभी व्यक्तियों की मालिश में एक ही तेल का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि सभी व्यक्ति के शरीर का तापमान, रक्त संचार, स्वास्थ्य समस्याएं, स्वास्थ्य समस्याओं के प्रकार व उसके जुड़ी जानकारियों के बारे में जानने के बाद ही तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

किस प्रकार है सिर्फ़ मालिश से बढ़कर

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जैसाकि हमने शुरुआत में ही कहा कि अभ्यंग में तेल मालिश की विशेष भूमिका है, लेकिन यह सिर्फ़ तेल मालिश ही नहीं है। जहां तेल मालिश का लाभ एक सीमित सीमा तक ही है, वहीं अभ्यंग में की गई मालिश के लाभ अनगिनत हैं। मौसम में परिवर्तन के चलते होने वाले प्रभाव हों, खान-पान संबंधी ग़लत आदतों के कारण हुई समस्याएं हों, अंतुलित आहार की कमी के कारण होने वाली शिकायतें हों, नज़र कमज़ोर होने लगी हो, शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का अभाव हो, उचित व्यायाम की कमी के कारण होने वाली जकड़न हो, मौसम के कारण शरीर में कहीं ऐंठन हो, शरीर के किसी हिस्से में पुराना दर्द हो, त्रिदोष, यानी कि वात, पित्त या कफ़ संबंधी दिक्कत हो, मांस-पेशियां कमज़ोर पड़ने लगी हों या फिर इसी प्रकार की कोई और स्वास्थ्य समस्या, अभ्यंग इसका अचूक उपाय है।

फ़ायदों की खान है अभ्यंग

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ऊपर बताए स्वास्थ्य संबंधी लाभों के अलावा भी अगर हम अभ्यंग के फ़ायदों के बारे में जानना चाहें तो इससे रक्त संचार तेज़ होकर सुधरता है। अगर नाभि उतर गई हो, यानी नाभि वाले हिस्से में दर्द हो, तेज़ थकान हो, मानसिक तनाव हो, नींद ठीक से न आती हो, मुंहासे या शरीर पर दाने, यानी फुंसियां वग़ैरह अक्सर या बहुत ज़्यादा होते हों, समय से पहले ही बढ़ती उम्र के लक्षण शरीर पर दिखाई देने लगे हों, पाचन ठीक से न काम करता हो, बाल बहुत ज़्यादा झड़ते हों, त्वचा रूखी, बेजान और कांतिहीन हो, तब भी अभ्यंग बहुत गहराई तक जाकर काम करता है। यदि अभ्यंग को नियमित रूप से करवाया जाए तो इसके लाभ और बढ़ जाते हैं। यहां यह समझने वाली बात है कि अगर शरीर का रक्त संचार, तापमान, त्रिदोष नियंत्रण में रहे तो सेहत अपने-आप निखरने लगती है और अच्छी सेहत ही सच्ची सुंदरता का आधार होती है।

अभ्यंग से जुड़ी हैं ये सावधानियां

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बेशक अभ्यंग से जुड़े लाभ अनगिनत हैं, लेकिन इसके सभी फ़ायदे सही तरीके से पाने के लिए इससे जुड़ी कुछ सावधानियों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। ये सावधानियां कुछ इस प्रकार हैं-

  • अभ्यंग से मिलने वाला लाभ सही रूप में तभी मिल पाता है, जब इसे करने वाला व्यक्ति योग्य, निपुण हो और जगह साफ़-स्वच्छ और विश्वसनीय रूप से प्रामाणिक। इस लिए ज़रूरी है कि आप  अपना अभ्यंग करवाने के लिए किसी ऐसी जगह ही जाएं, जो कि अभ्यंग के लिए प्रतिष्ठा और प्रशिक्षण प्राप्त हो। साथ ही वहां स्वच्छता संबंधी सभी नियमों का पूरा-पूरा ख़याल भी रखा जा रहा हो।
  • हालांकि अभ्यंग किसी भी समय, कुछ सावधानियों के साथ करवाया जा सकता है, फिर भी कोशिश कीजिए कि अभ्यंग हमेशा सुबह के वक़्त ही कराएं।
  • अभ्यंग शुरू करवाने से पहले उस क्लिनिक में मौजूद चिकित्सक से ज़रूर सलाह लें। वह आपके शरीर के तापमान और समस्याओं या आपकी अपेक्षाओं के हिसाब से ही तेल सुझाएंगे।
  • अभ्यंग कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद भूलकर भी न कराएं, बल्कि भोजन और अभ्यंग के बीच कम से कम दो घंटे का अंतराल होना चाहिए।
  • अगर आपको सर्दी, तेज़ ज़ुकाम, बुखार हो या कहीं चोट लगी हुई हो तो ऐसी हालत में अभ्यंग न करवाएं।
  • अभ्यंग करवाते समय चाहे तेल की गर्माहट हो या फिर हाथों का दबाव, उसे हमेशा अपनी पसंद और सहनशक्ति के अनुसार ही चुनें। ऐसा कम या ज़्यादा होने पर आप अपनी चिकित्सक को इस बारे में बता सकते हैं।
  • पीरियड्स होने पर या प्रेग्नेंसी होने के दौरान अभ्यंग नहीं करवाना चाहिए।
  • अगर आपका मन मिचला रहा हो या फिर उल्टी आने जैसा हो रहा हो, ऐसी स्थिति में भी अभ्यंग नहीं करवाना चाहिए।

अभ्यंग करवाने के बाद क्या करना चाहिए

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  • अभ्यंग करवाने के तुरंत बाद टायलेट ज़रूर जाएं। यूरिन द्वारा शरीर के कई विषैले तत्त्व इस तरह से बाहर निकल जाते हैं।
  • अभ्यंग करवाने के तुरंत बाद ही नहाने से बचना चाहिए। कम से कम आधे घंटे से लेकर चालीस मिनट का समय अपने आप को दें।
  • ज़्यादातर क्लिनिक्स में अभ्यंग के बाद स्टीम बाथ दिया जाता है। अगर आप स्टीम बाथ लेते हैं तो यह बहुत ही फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि इससे मालिश के दौरान सही हुए रक्त संचार के बाद पसीने के द्वारा शरीर के सभी विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इसके बाद आप शरीर को अच्छी तरह से पोंछ लीजए।
  • अभ्यंग करवाने के बाद हमेशा गर्म पानी से ही नहाना चाहिए। अगर गर्मी का मौसम भी है, तब भी पानी गुनगुना ही इस्तेमाल करें। यह शरीर के तापमान व त्रिदोष संतुलन को बनाए रखने में कारगर साबित होता है।

ये तो थे अभ्यंग के अनेक लाभों में से कुछ की जानकारी, लेकिन अगर आप एक बार अभ्यंग का अनुभव लेंगे तो इसके फ़ायदों के कारण बार-बार अपने आप को ऐसा करने से रोक नहीं पाएंगे। साथ ही इसके जुड़े आपके अनुभव अनकहे और अनूठे ही होंगे। वे आप चाहें तो हमसे साझा कर सकते हैं।

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