इस करवाचौथ पर कीजिए कुछ ऐसा कि आपका रिश्ता पाए और मज़बूती।

अक्सर हम सभी टीवी पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों में देखते हैं कि अगर पति अपनी पत्नी का बर्थडे या अपनी मैरिज एनिवर्सिरी भूल गया है अथवा उसे यह याद नहीं रहता कि उसकी पत्नी ने उसके लिए करवाचौथ का व्रत रखा है तो अगले दिन वह किसी महंगी ज्यूलरी या गिफ्ट शॉप में नज़र […]

ज़िंदगीनामा

अक्सर हम सभी टीवी पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों में देखते हैं कि अगर पति अपनी पत्नी का बर्थडे या अपनी मैरिज एनिवर्सिरी भूल गया है अथवा उसे यह याद नहीं रहता कि उसकी पत्नी ने उसके लिए करवाचौथ का व्रत रखा है तो अगले दिन वह किसी महंगी ज्यूलरी या गिफ्ट शॉप में नज़र आता है, जहां ‘मैन विल बी मैन’ की टैग लाइन के साथ वह कोई महंगी चीज़ ख़रीदता नज़र आता है, ताकि वह उस ख़ास मौके को भूल जाने की अपनी ‘भूल सुधार’ कर सके और सेल्समैन ‘महिला मनोविज्ञान के ज्ञाता’ की तरह उसे एक बेहद महंगा सा सामान यह कहकर थमा देता है कि ‘यह काम करेगा।’

देखने में इस तरह के विज्ञापन थोड़े मज़ेदार, मनोरंजक से लगते हैं, लेकिन क्या किसी स्त्री के मन का सच इतना ही होता है! इन विज्ञापनों की मानें तो एक स्त्री की सारी दुनिया सिर्फ़ गहने, साड़ियां या महंगे तोहफ़ों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। अगर ऐसा होता तो कभी किसी धनी व्यक्ति के वैवाहिक रिश्ते टूटते ही नहीं। एक पति और पत्नी के रिश्ते में जो बात सबसे ऊपर होती है, वह है आपसी प्यार, विश्वास, परस्पर सम्मान और ये सभी बहुत छोटी-छोटी बातों पर आधारित होते हैं। चलिए, थोड़ी पड़ताल करें मन की इन गहराइयों में उतरने की, ताकि अपने रिश्ते को बनाया जा सके और मज़बूत, और गहरा।

तोहफ़ा प्यार का प्रतीक है, प्यार नहीं

सबसे पहली बात तो हम यह हर्गिज़ नहीं कह रहे हैं कि आप अपनी पत्नी को तोहफ़े देना ही बंद कर दीजिए। हमारा कहना सिर्फ़ इतना है कि तोहफ़े प्यार का प्रतीक होते हैं, प्यार नहीं। यहां तक कि कई बार जब हम अपनी भागदौड़ से भरी ज़िंदगी में अपने रिश्तों को वक़्त नहीं दे पाते हैं तो उसकी भरपाई हम महंगे तोहफ़ों से कर देना चाहते हैं। यह सही नज़रिया नहीं है। व्यस्तता चाहे जितनी हो, रिश्तों को प्राथमिकता देनी ही चाहिए, क्योंकि हम जो कुछ भी करते हैं, वह अपनों के लिए ही तो करते हैं। भावनाओं की जगह कभी भी कोई सामान नहीं ले सकता।

एक नज़र प्यार से देखकर तो देखिए

काम के लिए तो रोज़ बाहर निकलना पड़ता है, लेकिन अपने पार्टनर के साथ कहीं घूमने-फिरने गए या फिर सुकुन से साथ बैठकर बात किए ही ज़माना बीत जाता है और पता ही नहीं चलता है। मौक़ा कोई ख़ास हो तो ज़्यादा से ज़्यादा कहीं बाहर लंच या डिनर के लिए चले जाते हैं, खाना खाते हैं, सेल्फी लेते हैं और चले आते हैं। यहां तक कि ये लम्हे भी अक्सर मुश्किल से ही जुट पाते हैं। कभी बिना वजह यूं ही सुकुन के कुछ पल साथ बिता कर तो देखिए। बिना किसी ज़रूरी बात के कुछ बातें यूं ही करके तो देखिए। जब न मांगा गया हो, तब भी थोड़ा साथ देकर तो देखिए। प्यार से भरी एक नज़र में बला का जादू होता है।

सम्मान से बड़ा मान कोई नहीं


हम कहते तो हमेशा यही हैं कि हम अपने पार्टनर का बहुत सम्मान करते हैं, पर अगर ईमानदारी से अपना आंकलन करें तो असल व्यवहार में यह बात ज़रा कम सी ही नज़र आती है। पत्नी अगर कामकाजी है तो उसके काम का आंकलन महज़ उसके पद से मत कीजिए। किसी भी संस्थान की कामयाबी में वहां के हर कर्मचारी का महत्वपूर्ण योगदान होता है और आपकी पत्नी भी वहां की एक महत्वपूर्ण कर्मचारी है। अगर आपकी पत्नी का क़द, पद, वेतन वग़ैरह आपसे ज़्यादा है तो इसे अपने अहम का प्रश्न न बनाकर उसी तरह से ख़ुश होइए, जैसेकि वह आपकी तरक्की पर होती है। और अगर आपकी पत्नी एक हाउस वाइफ़ है, तब तो आपको उनका और ज़्यादा सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उन्हीं की बदौलत आपका मकान ‘घर’ बन पाता है। एक घर में किए जाने वाले हर काम के लिए अगर आप मेड रखेंगे और उसका भुगतान करने लगें तो आपको एहसास होगा कि सिर्फ़ अपने परिवार और प्यार की ख़ातिर आपकी पत्नी चौबीस घंटे, सातों दिन एक ऐसी नौकरी करती हैं, जिसमें कोई संडे या हॉलीडे नहीं होता। आपसे मिला प्यार और सम्मान ही उसका सच्चा प्रतिदान है।

आई लव यू से ज़्यादा मे आई हेल्प यू

आजकल हर बात पर ‘आई लव यू’ कह देने का रिवाज़ कुछ ज़्यादा ही है। इसमें कुछ बुरा नहीं है। आप भी अपने पार्टनर को यह कहते रहा कीजिए, लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपका पार्टनर आपका ‘लव’ सुने ही नहीं, महसूस भी करे तो कभी ‘मे आई हेल्प यू’ भी कहकर देखिए, बल्कि कहिए भी क्यों, किसी छोटे-मोटे काम में हाथ ही बंटा दीजिए या फिर अपनी पार्टनर को एक दिन हर काम से छुट्टी देकर, ख़ुद उसके लिए वे सारे काम करके उन्हें सरप्राइज़ कर सकते हैं, जो वे हमेशा आपके लिए करती हैं, जैसेकि- बेड टी देना, आपका मनपसंद नाश्ता तैयार करना, कोई फेवरिट डिश बना देना या फिर बालों में हल्के-हल्के तेल मालिश ही कर देना। प्यार तो प्यार है, महसूस हो ही जाता है, बस ज़रा सा इज़हार करके तो देखिए।

उनके सिंगार पर कर दीजिए ज़रा सा दुलार

मौका चाहे करवाचौथ का हो या कोई और तीज-त्योहार, जब आपकी पार्टनर बनती-संवरती हैं तो उसमें भी सिर्फ़ ख़ुद को सजाने से ज़्यादा चाह होती है, आपकी एक प्यार भरी तारीफ़ी नज़र पाने की। वह आपके लिए तैयार हुई हैं, लिहाज़ा किसी और के बजाय आपके द्वारा की गई तारीफ़ या प्यार के दो बोल की बदौलत उनके चेहरे पर जो निखार आएगा, उसे सिर्फ़ आपका दिल ही समझ सकता है। उनके लिए कोई सरप्राइज़ ब्यूटी पैकेज, स्पेशल रोमांटिक डिनर या ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं। अगर कभी मौका मिले तो उन्हें अपनी पसंद से सजाएं या फिर कभी उनकी पसंद को अपना बनाएं। इन लम्हों में लगता है कि वक़्त बस यहीं थम कर रह जाए। यक़ीन नहीं आ रहा है तो इन बातों को कभी ख़ुद ही आज़माएं और असर जान जाएं।

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