कसौली की सड़कों पर एक यादगार वॉक

वैसे तो मैं पहले भी एक दो बार कसौली या था, लेकिन यह पहली बार था जब मैं और मेरी पत्नी एक साथ कसौली की यात्रा पर गए। मुझे याद है वह मार्च का महीना था जब यात्रा के लिए पहाड़ों का मौसम एक दम उपयुक्त होता है। पहाड़ों में इसी समय रोडोडेंड्रोन खिलने का […]

घुमक्कड़ी न्यूज़

वैसे तो मैं पहले भी एक दो बार कसौली या था, लेकिन यह पहली बार था जब मैं और मेरी पत्नी एक साथ कसौली की यात्रा पर गए। मुझे याद है वह मार्च का महीना था जब यात्रा के लिए पहाड़ों का मौसम एक दम उपयुक्त होता है। पहाड़ों में इसी समय रोडोडेंड्रोन खिलने का समय होता है।

कसौली एक रमणीय हिल स्टेशन है जो हिमाचल प्रदेश में स्थित है। कसौली कालका शिमला राजमार्ग पर 34 किमी की यात्रा करने के बाद 13 किलोमीटर लंबे घुमावदार रास्ते से होकर पहुंचा जा सकता है। कसौली एक रिज के ऊपर फैला हुआ है जहां से नीचे कालका घाटी का विशाल विस्तार दिखता है और दूसरी तरफ शिमला है और उससे आगे की ओर जाने वाली हरी पहाड़ियां का उत्तराधिकार है।

कसौली आज भी अपने छोटे शहर के आकर्षण को बरकरार रखे हुए है। शहर की भीड़ भाड़ और शोर शराबे से दूर कसौली वास्तव में एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। मजे की बात यह है कि यहां बहुत लोग नहीं आते हैं। कसौली अति व्यावसायिक और अति निर्मित शिमला के विपरीत बहुत सस्ता है और शिमला यहां से करीब पचास किमी दूर है। गर्मी के दिनों में जब अमीर लोगों की उत्साही भीड़ शिमला की ओर दौड़ जाती है तो कसौली पीछे छूट जाता है। बादल रहित रातों में कसौली से शिमला की जगमगती रोशनी साफ दिखाई देती है। कसौली के शांत वातावरण से शिमला की रोशनी काफी मनभावन दिखाई देती है। कसौली अपने मनभावन मौसम के लिए भी काफी मशहूर है यहां कुछ ही समय में बादल छा जाते हैं तो कुछ ही समय में सूरज की किरणें निकल आती है। कसौली में बान, चीड़ देवदार के पेड़ों के साथ जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियां भी देखी जा सकती हैं।

Sanawar School
Credit: The Hindu Business Line

कसौली बोर्डिंग स्कूलों के लिए अधिक जाना जाता है, जिसमें यहां मैदानी इलाकों के कई प्रतिष्ठित परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। सनावर एक ऐसा स्कूल है, जो कसौली के पास एक पहाड़ी की चोटी पर
स्थित है और लंबे देवदार से घिरा हुआ है, जिसके पूर्व छात्रों के नाम जैसे मेनका गांधी, पूजा बेदी, संजय दत्त हैं। कसौली में स्कूली बच्चों के रूप में इनमें से कुछ प्रसिद्ध लोगों की काली और सफेद
पीली तस्वीरें अभी भी मुख्य कसौली चौक के एक फोटो स्टूडियो में देखी जा सकती हैं।

Hotel Ross Common
Credit: Tripadvisor

हम वीकेंड ब्रेक पर कसौली गए थे। ब्रिटिश युग के एचपीटीसी होटल, रॉस कॉमन में हमारा प्रवास आरामदायक और मनभावन था।

यदि आप कसौली में टहलने निकलने हैं तो यहां आपको कोई खास शॉपिंग आर्केड नजर नहीं आएंगे। मेरे जैसे लोग जो प्रकृति के बीच शांति की तलाश करते हैं उनके लिए यह काफी सुखद अनुभव है।

हमारी एक सैर के दौरान, हम एक जिज्ञासु व्यक्ति से मिले। हमें पहली मुलाकात में वे काफी प्रभावशाली लगे। वह छोटे कद के काफी उम्रदराज व्यक्ति थे। जिन्होंने एक लंबे काले ओवरकोट, काले दस्ताने पहने हुए थे। उन्होंने अपने बर्फीले सफेद बालों के ऊपर एक काली टोपी पहन रखी थी। हमने उन्हें लोअर माल रोड पर धीरे धीरे टहलते हुए पाया। जब हमारी उनसे नजर मिली तो वे एक मीठी मुस्कान से साथ उन्होंने होटल के रास्ते में मिले एक पिल्ले पर टिप्प्णी की। जिससे मेरी पत्नी के मन में उनसे बात करने की उत्सुकता हुई और हम लोगों ने उनके पीछे चलने का फैसला किया। वह आदमी हमारे साथ बातचीत करने के लिए काफी उत्सुक लग रहा था। अपनी छोटी सी बातचीत के दौरान हमने पाया कि उसका नाम मिस्टर मैडॉक था, और वह एक फिलिपिनो था, जो लगभग 40 साल पहले भारत आया था और पिछले कुछ दशकों से कसौली का निवासी था। उन्होंने होटल अलीशा के एनेक्सी में एक आवास किराए पर लिया था, जो एक अन्य ब्रिटिश-युग की संरचना है जिसे एक प्रमुख होटल में परिवर्तित किया गया है। मिस्टर मैडॉक की एक बेटी थी जो एक पत्रकार थी और बंबई में रहती थी। वह छुट्टियों में उनसे मिलने आती रहती थी। वह एक पेंटर भी थीं और उन्होंने होटल अलीशा के कई वाटर कलर बनाए थे, जो होटल के बिलियर्ड रूम की दीवारों पर टंगे हुए थे। श्री मैडॉक शहर के एक बोर्डिंग स्कूल में संगीत पढ़ाते थे। उसने हमें बताया कि वह सभी प्रकार के पश्चिमी संगीत वाद्ययंत्रों की मरम्मत भी कर सकता है।

हमने उनसे कहा कि हम मुख्य चौक पर स्थित चर्च को देखना चाहते हैं, लेकिन किसी तरह दो मौकों पर हम वहां गए थे लेकिन दोनों बार वो हमें बंद मिला। मिस्टर मैडॉक की प्रतिक्रिया त्वरित थी और उन्होंने कहा कि वहां का पुजारी एक शराबी है और कई बार वो बहुत अधिक पी लेता है और फिर सो जाता है।

अगले दिन चर्च के पास से गुजरते हुए हमने देखा कि दरवाजा खुला हुआ है। चर्च फिर से एक प्रभावशाली दिखने वाले क्लॉक टॉवर के साथ एक ब्रिटिश-युग की गॉथिक संरचना थी। हम अंदर गए और पुजारी ने स्वागत किया जो अच्छा लग रहा था। देखने में वह काफी खाया पिया नजर आ रहा है था, मैडॉक का धन्यवाद क्योंकि उन्होंने पहले ही हमें इसके लिए आगाह किया था। पुजारी एक खुशमिजाज व्यक्ति था । वह चीजों को समझाते हुए हमें चर्च के चारों ओर ले जाने के लिए काफी उत्सुक थे। उसने हमें चर्च क्लॉक टॉवर पर चढ़ने की भी अनुमति दी, जो एक बहुत ही मुश्किल काम था। खस्ताहाल सीढ़ियां हमें टावर के आधे रास्ते तक ले गईं, जिसमें कसौली बस स्टैंड और मुख्य चौक के ऊपर एक प्रभावशाली बालकनी थी। टावर के ऊपर की यात्रा एक लड़खड़ाती सीढ़ी के माध्यम से होनी थी। जिसे हमने छोड़ देने का फैसला किया।

पुजारी के साथ हमारी बातचीत के दौरान उन्होंने हमें एक पुराना और प्रभावशाली दिखने वाला पाइप ऑर्गन दिखाया। राजसी दिखने वाला संगीत वाद्ययंत्र खराब अवस्था में था और उसे ठीक करने के लिए काफी निपुणता की आवश्यकता थी। पुजारी ने अफसोस जताया कि उपकरण की मरम्मत एक महंगा मामला है और उन्हें इसे करने के लिए दिल्ली से एक विशेषज्ञ की आवश्यकता होगी। तब मैंने कहा कि आप मिस्टर मैडॉक से इसकी मरम्मत क्यों नहीं करवाते। यह आपको बहुत कम खर्च करेगा और आपका समय भी बचाएगा। वह शराबी, एकदम से पुजारी की जवाब आया। वह तो हमेशा नशे में रहता है।

हम मुस्कराएं और वापस चल दिए।

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