Acid Attack Survivor : मानिनी बिसोई में एसिड अटैक के बाद भी कायम है जीत का जज्बा

Noida: अनथक लड़ाइयां लड़ने के बाद, एसिड अटैक सर्वाइवर (Acid Attack Survivor) मानिनी बिसोई (22) ने जीवन को दूसरा मौका दिया है। वह वर्तमान में नोएडा सेक्टर 21ए में शीरोज कैफे में शेफ और सर्वर है। वह YouTube पर एक कंटेंट क्रिएटर भी हैं और उनके 8-9k फॉलोअर्स हैं। 16 साल की मानिनी सबसे अच्छे […]

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Noida: अनथक लड़ाइयां लड़ने के बाद, एसिड अटैक सर्वाइवर (Acid Attack Survivor) मानिनी बिसोई (22) ने जीवन को दूसरा मौका दिया है। वह वर्तमान में नोएडा सेक्टर 21ए में शीरोज कैफे में शेफ और सर्वर है। वह YouTube पर एक कंटेंट क्रिएटर भी हैं और उनके 8-9k फॉलोअर्स हैं।

16 साल की मानिनी सबसे अच्छे कॉलेज में दाखिला लेना चाहती थी और अपने माता-पिता को गौरवान्वित करना चाहती थी।मानिनी बिसोई ओडिशा के सूरदा जिले से ताल्लुक रखती हैं जहां समाज में लड़की की जल्दी से जल्दी शादी करने का रिवाज था जबकि मानिनी इसके उलट जीवन में उच्च शिक्षा हासिल कर एक मुकाम हासिल करना चाहती थी। एक घटना ने मानिनी का जीवन पूरा बदल कर रख दिया। 27 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस पर तेजाब से हमला किया जिससे उसका चेहरा खराब हो गया।

वह शख्स मानिनी से 11 साल बड़ा था और मानिनी से शादी करना चाहता था। शादी के लिए वह मानिनी को मजबूर कर रहा था। हालांकि काफी जोर जबरदस्ती के बाद भी जब मानिनी ने उसकी बात नहीं मानी तो आधी रात को उसने तेजाब फेंककर मानिनी पर हमला कर दिया। वह दर्द से कराहते और रोते हुए जमीन पर गिर गई और उसकी मां फूट-फूट कर रोने लगी। एक पड़ोसी ने जैसे तैसे मानिनी को बचाया। मानिनी को अगले 1.5 साल याद नहीं हैं क्योंकि वह कटक, ओडिशा के अस्पताल में ज्यादातर समय बेहोश रही थी।

उनका संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। वे बताती हैं कि जब मैंने 2 साल बाद पहली बार खुद को देखा, तो मैं डर गयी था। मैंने जीने की सारी इच्छा खो दी थी।” जीवन ने उसके लिए एक अप्रत्याशित गलत मोड़ ले लिया था। उसके दोस्तों ने उसे छोड़ दिया और वह पूरी तरह से अकेला महसूस करने लगी।

अपनी सर्जरी के दौरान, वह कटक के एससीबी अस्पताल में रानी से मिली, जो एसिड अटैक की शिकार भी है। रानी ने एक ऐसे संगठन के लिए काम किया जिसने एसिड अटैक सर्वाइवर्स के उत्थान की दिशा में काम किया।

घर लौटने के बाद, उसके माता-पिता और रिश्तेदार ने उसे एक नया जीवन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। एक स्थानीय तहसील के दौरे पर, मानिनी ने बैंगलोर में एक प्रशिक्षण और रोजगार पद की खोज की। मानिनी ने अपने माता-पिता से पूछा कि क्या वह वहां काम कर सकती है। उसके माता-पिता उसके लिए खुश थे।

शुरुआत में वह यह सोचकर बहुत डरती थी कि क्या उसे स्वीकार किया जाएगा। उसकी दृढ़ता ने उसे आगे बढ़ाया। मानिनी ने 2 साल तक एक कपड़ा निर्माण कंपनी की पैकेजिंग टीम में काम किया। हालाँकि, उसने कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान अपनी नौकरी खो दी।

घर आने के बाद, उसकी दोस्त रानी ने उसे नोएडा इंटरनेशनल स्टेडियम, सेक्टर 21 में एसिड अटैक सर्वाइवर्स द्वारा चलाए जा रहे शेरोज़ कैफे में नौकरी दिलाने में मदद की। उसने हाल ही में वहाँ इंटर्नशिप पूरी की और शेरोज़ टीम के साथ रह रही है।

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