हस्तशिल्प का हुनर देखना है तो दिल्ली हाट, जनकपुरी के नेशनल हैंडलूम एक्सपो आइए!

दिल्ली हाट, जनकपुरी में पूर्वोत्तर की संस्कृति और शिल्प का शानदार नमूना देखने के लिए आप नेशनल हैंडलूम एक्सपो आ सकते हैं। इन दिनों यहां शॉपिंग का भी बेहतरीन अनुभव लिया जा सकता है।

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National Handloom Expo 2022: अगर आप ‘सात बहनों’ के नाम से लोकप्रिय पूर्वोत्तर के राज्यों की समृद्ध संस्कृति को वहां हथकरघे से निर्मित कपड़ों के माध्यम देखना चाहते हैं तो आपको जनकपुरी स्थित दिल्ली हाट आना चाहिए। आजकल यहां नेशनल हैंडलूम एक्सपो का आयोजन चल रहा है। यह आयोजन 31 मई तक यहां जारी रहेगा। सुबह 11 बजे से देर शाम आठ बजे तक आप यहां आ सकते हैं।

रंग-बिरंगे कपड़े

एक्सपो में यूं तो पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से आए बुनकर हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन मणिपुर व असम राज्यों से आए बुनकरों की यहां विशेष भागीदारी है। जिस तरह पूर्वोत्तर का जिक्र आते ही वहां की हरियाली दिमाग पर छाने लगती है। ठीक उसी तरह यहां एक्सपो में करीब 30 स्टॉलों पर लगे रंग-बिरंगे कपड़े आपका ध्यान खींच लेंगे। असम के कपड़ों पर सफेद व लाल तो नागालैंड के कपड़ों पर काला व लाल रंग का विशेष प्रभाव नजर आता है। हरा, लाल व सफेद के बीच खासतौर पर हरे रंग के कपड़े यहां नजर न आएं, ऐसा हो ही नहीं सकता।

सभी के लिए कुछ न कुछ

यहां लगे प्रत्येक स्टॉल पर आपको सभी के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। साड़ी, जैकेट, शॉल, शर्ट, कुर्ते के अलावा यहां आपको कई तरह की ज्वैलरी भी मिलेगी। ये ज्वैलरी पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक झलक देती हैं। असम का खास सफेद व लाल रंग का गमछा यहां हर स्टॉल पर आपको नजर आएगा। इसके अलावा मणिपुर व नागालैंड में शादी के दौरान पहनी जाने वाली खास धोती व साड़ी भी यहां आपको मिलेगी। बच्चों के लिए भी यहां कई तरह के कपड़े हैं।

एरी के सिल्क के परिधानों की शान

यहां एरी सिल्क के बने कई तरह के परिधान उपलब्ध हैं। असम की बोड़ो संस्कृति में जैकेट का खास महत्व है। वह भी आप यहां खरीद सकते हैं। असम की संस्कृति में गमछे का भी विशेष महत्व है। यहां गमछा भी मिलेगा। अगर आपको भी हस्तशिल्प के सामान लुभाते हैं तो आप लोगों से आग्रह है कि एक बार यहां जरूर आएं।

दीपा गोगोई, हथकरघा बुनकर

मैं असम से आई हूं। यहां आने वाले कई लोग खरीददारी के दौरान मुझसे असम की संस्कृति, वहां की आबोहवा के बारे में सवाल करते हैं। बातों ही बातों में वे पूर्वोत्तर की संस्कृति से वाकिफ होने लगते हैं। इसी तरह हम लोग भी यहां आकर उत्तर भारत की संस्कृति को समझ रहे हैं।

नीतिका बोरा, हथकरघा बुनकर

आज के समय में हथकरघा निर्मित कपड़ों का बाजार सीमित रह गया है। यह एक्सपो लोगों के लिए अवसर है कि वे यहां खरीददारी करने के साथ-साथ उन बुनकरों से मिलें, जो कड़ी मेहनत से हथकरघा पर कपड़े बुनते हैं।

पन्ना, हथकरघा बुनकर

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