पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी बढ़ रहा प्रदूषण

अरावली पर्वत पर गुरूग्राम और फरीदाबाद जिले में कई जगह अवैध रूप से खनन किया जा रहा है। शिकायत और रिमाइंडर भेजने के बाद भी कार्रवाई तो दूर खनन कार्य रुक नहीं रहा है।

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Faridabad: प्रदेश सरकार शहर को प्रदूषण मुक्त (Pollution free) बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के दावें कर रही है। जिसके तहत प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की तरफ से कई योजनाओं पर काम करने का दावा समय समय पर किया जाता है। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च भी किये जा रहे हैं। हर साल पर्यावरण बचाने के लिए लाखों पेड़ लगाने का ड्रामा किया जाता है। वहीं दिल्ली एनसीआर की लाइफ लाइन अरावली पर्वत को सरकार खुद ही बर्बाद करने पर तुली हैं। बंधवाड़ी पर कूड़ा डालने की जगह नहीं बची तो कचरा अरावली के जंगलों में डालना शुरू कर दिया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शिकायत पर करने पर कूड़े को आग लगा दी जाती है। अरावली पर्वत पर गुरूग्राम और फरीदाबाद जिले में कई जगह अवैध रूप से खनन किया जा रहा है। शिकायत और रिमाइंडर भेजने के बाद भी कार्रवाई तो दूर खनन कार्य रुक नहीं रहा है। इसी तरह अरावली के वन क्षेत्र में चारों तरफ धड़ल्ले के साथ अवैध निर्माण हो रहे हैं। निगम की तरफ से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। वन विभाग के अधिकारी किसी तरह अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज भी करवा दे तो पुलिस की तरफ से मामलों को लंबित कर दिया जाता है। ऐसे में कैसे पर्यावरण संरक्षण हो सकता है।

स्वच्छता के नाम सिर्फ ड्रामा

स्वच्छता सर्वेक्षण में अंक हासिल करने के लिए नगर निगम द्वारा चंद दिनों का स्वच्छता लेकर ड्रामा किया जाता है, लेकिन बाद में फिर शहर की वहीं स्थिति हो जाती है। शहर की ऐसी कोई सडक़ नहीं हैं, जिसके दोनों तरफ गंदगी या मिट्टी के ढेर न लगे हों। यहां तक निगम ने खुद ही सडक़ों के किनारे कूड़ा डालने के डंपिंग पॉइंट बनाए हुए हैं। ईकोग्रीन कंपनी ने ठेका लेते समय घरों से सूखा और गीला कूड़ा अलग अलग एकत्रित करने का वायदा किया था। कंपनी गाडिय़ों में भी दो बॉक्स बनाए गए थे। चंद दिनों बाद ही गाडिय़ों में एक बॉक्स रह गया। वहीं लोगों को भी जागरूक नहीं किया। जिससे लोग दोनों तरह का कूड़ा एक साथ डालते हैं। जिससे कूड़े के निस्तारण की समस्या बढ़ रही है। कंपनी द्वारा बंधवाड़ी और अरावली में लगातार कूड़े के पहाड़ बनाए जा रहे हैं। जिससे पर्यावरण को तो काफी नुकसान हो ही रहा है, साथ ही भूजल भी लगातार जहरीला हो रहा है, लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

विकास नहीं विनास कर रहे हैं

बाइपास रोड को मुम्बई बड़ौदरा एक्सप्रैस वे का हिस्सा बनाया जा रहा है। इस हाइवे के रास्ते में करीब डेढ़ सौ निर्माण आ रहे हैं। इन निर्माणों को बचाने के लिए एचएसवीपी ने हाइवे की एनलाइनमेंट बदलते हुए पिछले दिनों ग्रीनबेल्ट को उजाडऩे का काम शुरू कर दिया था। इस दौरान एचएसवीपी ने ग्रीनबेल्ट पर लगे सैंकड़ों हरे भरे पेड़ों को कटवा डाला। कुछ समय पहले स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पहले से ठीक ठाक सडक़ को स्मार्ट रोड बनाने का काम किया गया। इस दौरान ठीक ठाक ग्रीनबेल्ट को मलवा डाल कर उजाड़ दिया। वहीं रास्ते में आने वाले दर्जनों पेड़ों को भी काट दिया गया। ठीक ठाक ग्रीनबेल्ट में टाइल्स बिछा दी गई। इसी तरह एनआईटी की पैरिफेरल रोड के निर्माण के लिए भी न केवल पेड़ काटे गए बल्कि ग्रीनबेल्टों को भी उजाड़ा दिया गया। वहीं पर एनआईटी की रेलवे रोड पर अंडरग्राउंड नाले के निर्माण के रास्ते में आने वाले हरे भरे पेड़ों को उखाड़ दिया गया, लेकिन इतनी संख्या में पेड़ों की बलि देने के बाद संबंधित विभागों ने कहीं पेड़ लगाने की जरूरत महसूस नहीं की।

अरावली का हो रहा चीरहरण

सरकार द्वारा पर्यावरण को बचाने के नाम पर सिर्फ दिखावा ही किया जा रहा है। अरावली पर्वत को एनसीआर का फेफड़ा माना जाता है, लेकिन अरावली पर ध्यान देना तो दूर बल्कि इसका जमकर चीरहरण किया जा रहा है। अरावली पर जगह जगह धड़ल्ले के साथ अवैध रूप से फार्म हाउस, वैक्वेट हॉल, व्यवसायिक संस्थानों और अन्य कई तरह का निर्माण हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अरावली पर गुरूग्राम और फरीदाबाद जिले में करीब एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर अवैध खनन किया जा रहा है। पिछले दिनों अरावली का भ्रमण करने गए पर्यावरण प्रेमियों ने इसका खुलासा किया था। इससे पहले 15 अप्रैल 2021 को पर्यावरण प्रेमियों ने संबंधित विभागों के पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद पर्यावरण प्रेमियों द्वारा कई बार रिमांइडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब भी अरावली पर फरीदाबाद, गुरूग्राम और नूंह में अवैध खनन कार्य कर पत्थर चोरी करने काम लगातार जारी है। शहर के पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि इसी तरह अरावली को बर्बाद किया जाता रहा तो एनसीआर रहने लायक नहीं रह जाएगा।

पर्यावरण बचाने का ड्रामा

पर्यावरण प्रेमी विष्णु गोयल का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति संबंधित विभाग जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण चंद पौधे लगाने और फोटों सेशन तक ही सीमित होकर रह गया है। जबकि दूसरी तरफ सरेआम अरावली पर्वत का चीरहरण किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के बावजूद अरावली पर बने अवैध निर्माणों को नहीं हटाया जा रहा है। जिससे अवैध निर्माणों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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