क्रिकेट के प्रेम के कारण दीपक शर्मा ने की हर बाधा पार

गुना के रहने वाले दीपक शर्मा (35)। जिनकी आंखों में भी बचपन से सचिन की ही तरह क्रिकेटर बनने का सपना था, लेकिन यह सपना देखना दीपक के लिए काफी कठिन होने वाला था, क्योंकि पोलियो के कारण सचिन के दोनों पैर प्रभावित हो गए थे।

Delhi न्यूज़

Delhi: कई  भारतीय युवा क्रिकेट के आसमान में सचिन तेंदुलकर को चमकते हुए देखकर बड़े हुए। इन युवाओं की आंखों में भी
सचिन तेंदुलकर की ही तरह गौरव हासिल करने का सपना था। इन्हीं में से एक थे मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से के एक छोटे से शहर गुना के रहने वाले दीपक शर्मा (Deepak Sharma)(35)। जिनकी आंखों में भी बचपन से सचिन की ही तरह क्रिकेटर बनने का सपना था, लेकिन यह सपना देखना दीपक के लिए काफी कठिन होने वाला था, क्योंकि पोलियो के कारण सचिन के दोनों पैर प्रभावित हो गए थे।

Credit: CitySpidey

मात्र दो साल की उम्र में दीपक को पोलियो हो जाने के कारण उनका क्रिकेटर बनने का सपना साकार करना काफी मुश्किल भरा साबित हुआ, लेकिन अपने दृढ़ विश्वास, खेल के प्रति जुनून और मानसिक दृढ़ता के कारण दीपक ने आखिरकार अपने इस सपने को साकार किया। आज वह न केवल मध्य प्रदेश व्हीलचेयर क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं बल्कि सीमित ओवरों की क्रिकेट लीग में कोलकाता इकाई का नेतृत्व भी कर रहे हैं।

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दीपक ने मध्य प्रदेश की राज्य व्हीलचेयर क्रिकेट टीम बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वास्तव में, उन्होंने सचिन तेंदुलकर से एक बेहतर प्रदर्शन किया। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के पैरा-फेंसिंग एथलीट भी हैं। उन्होंने नवंबर 2021 में पैरा फेंसिंग टूर्नामेंट में इटली में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वह अगले पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने की भी तैयारी कर रहे हैं।

दीपक जब राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में व्हीलचेयर लीग टूर्नामेंट में अपनी कोलकाता टीम का नेतृत्व करने के लिए आए थे, तब सिटीस्पाइडी ने उनसे मुलाकात की। जब हम उनसे मिले तो वह कुछ बल्लेबाजी अभ्यास के लिए तैयार हो रहे थे। उन्होंने पूरी गंभीरता से अपनी तैयारी की, पैड, दस्ताने पहने और भारी दिखने वाला बल्ला चलाया।

दीपक कहते हैं, “मैं क्रिकेट को लेकर काफी गंभीर हूं। यह मेरे जीवन का एकमात्र जुनून है। जब मैं बच्चा था तब भी मुझे कभी नहीं लगा था कि मेरी कमी मुझे क्रिकेट खेलने से रोकेगी। बहुत कम उम्र से व्हीलचेयर से बंधे दीपक ने एक बच्चे के रूप में सबसे अच्छे तरीके से क्रिकेट खेला और अपनी वयस्कता तक इसे जारी रखा। फिर उन्होंने दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया के बारे में सुना और उसने इनकी जिंदगी बदल दी।

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