एमसीडी के एकीकरण पर दिल्लीवासियों की प्रतिक्रिया

18 अप्रैल, 2022 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस अधिनियम को स्वीकृति प्रदान की थी। दिल्ली। गृह मंत्रालय ने दिल्ली नगर निगम को एमसीडी अधिनियम 2022 के बारे में अधिसूचित किया कि दिल्ली नगर निगम अब पूर्णत: एक ही संगठन होगा। इस अधिनियम के अंतर्गत उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी), दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) […]

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18 अप्रैल, 2022 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस अधिनियम को स्वीकृति प्रदान की थी।

दिल्ली। गृह मंत्रालय ने दिल्ली नगर निगम को एमसीडी अधिनियम 2022 के बारे में अधिसूचित किया कि दिल्ली नगर निगम अब पूर्णत: एक ही संगठन होगा। इस अधिनियम के अंतर्गत उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी), दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) और पूर्वी दिल्ली नगर निगम (इडीएमसी) फिर से संयुक्त रूप में नज़र आएंगे।

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी एक गजट अधिसूचना के अनुसार इस अधिनियम को 18 अप्रैल, 2022 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की स्वीकृति मिल गई थी। नगर निकाय चुनाव से पहले शहर के नगर पालिका वार्डों को नया स्वरूप देने के लिए दोबारा नई तरह से जनगणना की जाएगी। इसके बाद एमसीडी के चुनाव होंगे।

इस घटनाक्रम पर दिल्लीवासियों के विचार जानने के लिए हमने दिल्ली-एनसीआर के कुछ लोगों से बात की।

दिल्ली एमसीडी के आगामी काउंसलर चुनावों की उम्मीदवार माधुरी वार्ष्णेय से जब इस विषय पर बात की गई तो उनका कहना था कि सन 2012 में एमसीडी को 272 वार्डों के साथ तीन भागों में विभाजित किया गया था। अब पंद्रह सालों बाद हमें बताया गया कि एमसीडी के एकीकरण का मुख्य कारण कर्मचारियों का वेतन है, जो काफी समय से लंबित पड़ा है। केंद्रीय एमसीडी ने 2000 के दशक में तब कुशलता से काम नहीं किया, जब यह एकीकृत था तो अब हम इससे अच्छे परिणाम की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। मुझे नहीं पता कि यह नई व्यवस्था धरातल पर कैसे काम करेगी। मुझे आश्चर्य होता है कि जब तीन निकाय ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे तो उनका एकीकरण करने से एक निकाय पर्याप्त लाभ कैसे प्रदान कर सकता है। चुनाव में शायद अभी साल भर लग सकता है। देखते है कि ये नया परिसीमन कैसा काम करेगा।

माधुरी जी का कहना है कि केंद्र सरकार का दावा है कि उन्होंने व्यवस्था को ठीक करने के लिए एमसीडी को एकजुट करने का निर्णय लिया है, जबकि उनके द्वारा अधिकारियों या जनता के साथ कोई रोडमैप साझा नहीं किया गया है।

गुड़िया गुप्ता, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जीके एम ब्लॉक, इस विषय में कहती हैं कि 2012 में एमसीडी को एनडीएमसी, एसडीएमसी और इडीएमसी में विभाजित करने का बड़ा कारण यह था कि इससे यह ठीक से काम कर सके। तीन अलग स्वतंत्र एमसीडी बनाए रखना ज्यादा आसान था। जहां तक मुझे लगता है, एमसीडी का एकीकरण एक बुरा फैसला है। वैसे भी कोविड के समय एमसीडी का प्रदर्शन काफी खराब था। मुझे समझ नहीं आ रहा कि एक केंद्रीय एमसीडी पूरी तरह से मामलों का प्रबंधन कैसे करेगी। दक्षिण दिल्ली नगर निगम कुछ नहीं कर रहा है। पार्कों की स्थितियां काफी खराब हैं। घास लंबी हो रही है और अधिकांश का रखरखाव लोगों द्वारा ही किया जा रहा है। लंबे समय से निर्माणाधीन सड़कें कई तरह की समस्याएं पैदा कर रही हैं, जिसके कारण लोग परेशान हैं।

दक्षिण दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता विशाल राजपूत, जो कि पेशे से चाटर्ड एकाउंटेंट हैं, कहते हैं कि केंद्र इस विलय का कारण अपर्याप्त बता रहा है। तीनों निगमों- दक्षिण, उत्तर और पूर्व की सभी देनदारियों, कर्मचारियों और राजस्व स्रोतों को एकीकृत एमसीडी में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जिससे लोगों को अपना वेतन समय पर मिल सके। हालांकि अगर आप मुझ से पूछें तो एसडीएमसी को दोनों अन्य निगमों की तुलना में अधिक राजस्व प्राप्त होता है। उत्तर और पूर्वी निगम में कम राजस्व उत्पन्न होता है, क्योंकि कई घर पंजीकृत नहीं हैं और कई करों का भुगतान नहीं करते। अगर सभी निगमों को मिला दिया जाता है तो यह पूरी प्रणाली में असंतुलन पैदा कर देगा।

विशाल राजपूत आगे कहते हैं कि मुझे लगता है, आशंका का विषय यह है कि क्या निगमों के एकीकरण के बाद हम किसी समस्या का समाधान कर भी पाएंगे या नहीं। एक वॉर्ड में औसतन 60 हज़ार मतदाता थे। एकीकरण और परिसीमन के बाद यह मतदाता बढ़कर अस्सी हज़ार होंगे और वॉर्डों की संख्या 250 होगी। जो पार्षद 60 हज़ार मतदाताओं को नहीं संभाल पा रहे थे, वे 80 हज़ार मतदाताओं को कैसे संभालेंगे। मुझे आशंका है कि एमसीडी की जो प्रशासन प्रक्रिया पहले ही अराजक थी, वह अब और जटिल हो जाएगी।

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