रोहिणी एसटीपी में बनेगी दिल्ली की सबसे बड़ी झील

दिल्ली में झीलों के कायाकल्प के लिए सौंदर्यीकरण, भू निर्माण और ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा।

न्यूज़

Delhi: जल्द ही दिल्ली के रोहिणी इलाके में यहां की सबसे बड़ी झील बनने जा रही है। इस दिशा में एक झील को पुनर्जीवित किया जा रहा है। मेगा रोहिणी झील परियोजना राजधानी दिल्ली की पुनर्जीवित होने वाली 23 झीलों में से एक है और इसे दिल्ली सरकार की एक प्रमुख परियोजना के रूप में भी नामित किया जा रहा है।

इसी श्रृंखला में रोहिणी के सेक्टर 25 के क्षेत्र में भी झीलों को विकसित किया जा रहा है। झीलों को पुनर्जीवित करने के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर कार्य किया जा रहा है- ट्रीटमेंट प्लांटों का निर्माण, झीलों का सौंदर्यीकरण और भूनिर्माण।

Credit: Supplied

माना जा रहा है कि रोहिणी झील परियोजना आठ महीने की समय सीमा में पूरी हो जाएगी और इस कार्य के पूरा होने के एक माह के भीतर ही इसे चालू कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस रोहिणी झील का निर्माण 80 एकड़ भूमि पर किया जाएगा और इसका उपयोग पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए होगा। झील बनाने का मुख्य उद्देश्य इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है, जिससे आगंतुक यहां आकर प्रकृति का आनंद ले सकें।

Credit: Supplied

जल मंत्री और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन ने रोहिणी के सेक्टर 25 स्थित रोहिणी झील का पिछले दिनों दौरा करके निर्माण कार्यों की समीक्षा की थी। तब उन्होंने अधिकारियों को संरचनाओं को सुधारने के निर्देश भी दिए थे, जिससे भूमिगत जल पुनर्भरण की क्षमता को अधिक से अधिक किया जा सके।  यह काम आठ महीने में पूरा कर दिया जाएगा।

Credit: Supplied

गौरतलब है कि पूरी परियोजना मोटे तौर पर सीवेज जल उपचार और झीलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर आधारित है। रोहिणी झील और रोहिणी एसटीपी करीब-करीब 100 एकड़ भूमि के परिसर में स्थित है। जहां सीवेज उपचार संयत्र 20 एकड़ में है, जबकि हरित क्षेत्र को 80 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। 15 एमजीडी की क्षमता वाले एसटीपी में अपशिष्ट जल का उपचार किया जाएगा और उपचारित जल को झीलों में छोड़ा जाएगा।

रोहिणी झील विकास परियोजना के पूरा होने पर भूमिगत जल में भी सुधार होगा साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में इसकी महती भूमिका होगी।

झील में एक बेसिक फुटपाथ होगा और दूसरा फुटपाथ 4 से 5 मीटर चौड़ा पैदल मार्ग होगा, जो जंगल और झील के बीच से गुजरेगा। इस पर चलकर यात्रियों को प्रकृति के करीब आने का मौका मिलेगा।

इस परियोजना में पार्किंग स्पेस, कैफेटेरिया, चिल्ड्रन पार्क, ऐंट्रेस प्लाजा, ग्रैंड स्टेप्ड प्लाजा आदि जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं भी होंगी। इसके साथ ही झील में एक स्टेप्ड वाटर गार्डन, वाटर एक्लोव्स और भारत में जल संचयन की कहानी बताने वाला आउटडोर संग्रहालय भी विकसित किया जाएगा। रोहिणी झील का उपयोग लोग पिकनिक मनाने, समारोहों, सैर-सपाटे, सुबह और शाम की सैर, शारीरिक व्यायाम, खेल-कूद, दर्शनीय स्थलों की यात्रा और मनोरंजन के लिए कर सकते हैं।

यह झील न केवल दिल्ली के निवासियों के लिए वन स्टॉप मनोरंजक स्थल के रूप में कार्य करेगी, बल्कि इसके कई पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। यह परियोजना अपशिष्ट जल को उपचारित कर न सिर्फ पुन: उपयोग में लाएगी, बल्कि अधिक से अधिक
हरित क्षेत्र को विकसित करके पर्यावरण में सुधार भी करेगी। यह भूमिगत जल स्तर को रिचार्ज करने में महती भूमिका निभाएगी और पौधों व जानवरों तथा पक्षियों की कई प्रजातियों को आवास प्रदान करेगी। रोहिणी झील तपती गर्मी के दौरान तापमान को संतुलित करने में भी मदद करेगी।

दिल्ली को झीलों का शहर बनाने के सपने को साकार करने के लिए दिल्ली सरकार जी जान से काम कर रही है। झीलों के शहर परियोजना में दो फोकस क्षेत्र हैं, झीलें और अन्य जल निकाय। विकास के पहले चरण में 250 जलाशयों और 23 झीलों को सरकार अपने हाथ में लेगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहरी बाढ़ को रोकना और वर्षा के पानी के लिए जलाशयों का निर्माण करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.