चढ़ते पारे व दूषित जलापूर्ति के कारण हो सकता है डायरिया, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया अभियान

आमतौर पर जून-जुलाई में डायरिया का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इस बार क्षेत्र में जगह जगह दूषित जलापूर्ति की समस्या के कारण स्थिति गंभीर होने वाली है।

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Dwarka: आमतौर पर जून-जुलाई में डायरिया का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इस बार क्षेत्र में जगह जगह दूषित जलापूर्ति की समस्या के कारण स्थिति गंभीर होने वाली है। तमाम तरह की आशंका के बीच दिल्ली में जगह जगह स्वास्थ्य विभाग की ओर से दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जा रहा है। 13 से 27 जून तक चलने वाले इस पखवाड़े के तहत जिले के अंतर्गत प्रत्येक अस्पताल, डिस्पेंसरी व आंगनबाड़ी में ओआरएस व जिंक कार्नर तैयार किया गया है।

द्वारका में चिकित्सकों ने किया लोगों को जागरूक

द्वारका सेक्टर-9 स्थित इंदिरा गांधी अतिविशिष्ट अस्पताल में पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अस्पताल के निदेशक डा. बीएल चौधरी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. अंजना कौशल, दस्त नियंत्रण पखवाड़े के संयोजक डा. पुलक, डा. देवलीना, डा. बृजेश कुमार समेत कई अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपनगरी में कार्य करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में आए। इस दौरान डा. पुलक ने बताया कि दिन में तीन बार या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है। डायरिया में रोगी के शरीर में पानी व नमक की अत्यधिक कमी हो जाती है, जिससे उसका शरीर कमजोर हो जाता है और शरीर में संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है। दस्त के कारण पानी के साथ जरूरी एल्क्ट्रोलाइट (कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, सोडियम और क्लोराइड) का तेजी से ह्रास होता है। बच्चों में इसकी कमी को दूर करने के लिए ओरल रीहाइड्रेशन सलूशन (ओआरएस) एवं जिंक घोल दिया जाता है। इससे डायरिया के साथ निर्जलीकरण से भी बचाव होता है।

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ओआरएस व जिंक कार्नर

स्वास्थ्य केंद्रों पर ओरआरएस व जिंक कार्नर बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। यहां लोगों को ओरआरएस व जिंक की गोलियां उपलब्ध कराई जा रही है। लोगों को ओआरएस बनाने की प्रक्रिया व जिंक गोली के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही समझाया जा रहा है कि बच्चे की उम्र छह माह से ज्यादा है तो उसे 20 मिली ग्राम जिंक रोजाना दिया जा सकता है। बच्चे को करीब डेढ़ से दो सप्ताह तक यह टेबलेट दी जा सकती हैं। यदि बच्चे की उम्र छह माह से कम है तो जिंक की मात्र 10 मिलीग्राम होनी चाहिए। इसके अलावा छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराने से शिशु का डायरिया से बचाव संभव है। डा. पुलक ने बताया कि प्रत्येक पांच साल व उससे कम उम्र के बच्चे को ओआरएस का पैकेट व जिंक की गोलियां मिले, इसके लिए स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चों की ओपीडी के बाहर व टीकाकरण कक्ष के बाहर विशेष काउंटर लगाया गया है। बच्चे की जांच के लिए पहुंचने वाले प्रत्येक अभिभावक को ओआरएस का पैकेट व जिंक की गोली मुहैया कराई जा रही है।

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