दिल्लीवालों को आशीर्वाद देने के लिए लगभग तैयार हैं मां दुर्गा

नई दिल्ली। दुर्गा मूर्ति को बनाने के लिए पश्चिम बंगाल से दिल्ली आने वाले कई कारीगरों की कड़ी मेहनत आखिरकार खत्म हो गई है, क्योंकि नवरात्रि का त्योहार आ गया है। पश्चिमी दिल्ली कालीबाड़ी में दुर्गा की मूर्तियों को दिल्ली और उसके बाहर के लोगों को आशीर्वाद देने के लिए चित्रित किया जाता है और […]

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नई दिल्ली। दुर्गा मूर्ति को बनाने के लिए पश्चिम बंगाल से दिल्ली आने वाले कई कारीगरों की कड़ी मेहनत आखिरकार खत्म हो गई है, क्योंकि नवरात्रि का त्योहार आ गया है। पश्चिमी दिल्ली कालीबाड़ी में दुर्गा की मूर्तियों को दिल्ली और उसके बाहर के लोगों को आशीर्वाद देने के लिए चित्रित किया जाता है और सभी को सजाया जाता है। द्वारका में दक्षिणायन (सेक्टर 4) और ऐकोटन (सेक्टर 4) के लोकप्रिय दुर्गा पूजा पंडाल भी यहाँ अपनी दुर्गा की मूर्तियाँ बनवा रहे हैं।

हाल ही में पश्चिम दिल्ली कालीबाड़ी की यात्रा के दौरान वहां कारीगरों को काम करते देखा गया। वे धीरे धीरे देवी दुर्गा की मूर्तियों को संवार रहे थे। कोई देवी दुर्गा की मनमोहक आंखों को बनाने के लिए हाथों में पेंट ब्रश लिए हुआ था वहीं कोई अन्य देवी के सिर पर बाल लगा रहा था। ये कारीगर कुछ ही दिनों में अपना काम समाप्त करने के बाद (नवरात्रि के सातवें दिन) को अपने वतन वापस चले जाएंगे। मजे की बात यह है कि जिस दिन दुर्गा पंडालों को जनता के लिए खोला जाता है वे उस समय वापस अपने वतन के लिए वापस यात्रा कर रहे होंगे। उनके काम की विडंबना यह है कि देवी दुर्गा को जीवन देने के लिए तीन महीने से अधिक समय बिताने के बाद भी, वे वास्तव में कभी भी किसी दुर्गा पूजा में शामिल नहीं होते हैं। हालांकि, उन्हें इसका कोई मलाल नहीं है।जैसा कि 24 परगना (सुंदरबन), पश्चिम बंगाल के एक शिल्पकार शिवंकर चित्रकार ने आनंदपूर्वक कहा, “यह हमारे सोने का समय होता है।”

 

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