Faridabad: ऐसे पढ़ेगा तो कैसे बढ़ेगा इंडिया : 2800 बच्चों के लिए सिर्फ 18 कमरें

स्कूल में 2800 बच्चें पढ़ते हैं। लेकिन इनके बैठने के लिए सिर्फ 18 कमरों की ही व्यवस्था है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को किस तरह से स्कूल में बैठकर पढ़ना पड़ता होगा, लेकिन किसी को इन बच्चों की फिक्र नहीं है।

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Faridabad: सेहतपुर गांव में स्थित सीनियर सेकेंड्री स्कूल में बच्चों की ज्यादा संख्या को देखते हुए स्कूल को  शिफ्टों में चलाया जा रहा था, लेकिन अब फिर से एक शिफ्ट किये जाने से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की काफी दुर्गति हो रही है। स्कूल में 2800 बच्चें पढ़ते हैं। लेकिन इनके बैठने के लिए सिर्फ 18 कमरों की ही व्यवस्था है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को किस तरह से स्कूल में बैठकर पढ़ना पड़ता होगा, लेकिन किसी को इन बच्चों की फिक्र नहीं है।

जानकारी के मुताबिक सेहतपुर स्थित स्कूल में करीब 2800 बच्चों के लिए 21 कमरे हैं। इनमें स्टॉफ रूम, इंचार्ज रूम, कंप्यूटर रूम शामिल हैं। कई कमरों में सामान भरा हुआ है। ऐसे में बच्चों के लिए पर्याप्त कमरे नहीं है। कुछ समय पहले यहां के जर्जर 18 कमरों को तोड़ दिया गया था। इस समस्या को देखते हुए तत्कालीन शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी ने स्कूल को दो शिफ्ट में चलाने की व्यवस्था की थी। जिससे बच्चों को पढ़ने में आसानी हो रही थी, लेकिन उनके तबादले के बाद आई शिक्षा अधिकारी मुनेश चौधरी ने स्कूल को एक शिफ्ट में कर दिया। जिससे बच्चों को बैठने के लिए स्कूल में पर्याप्त कमरों की समस्या फिर उत्पन्न हो गई है। बच्चों को बरामदे में बैठाया जा रहा है। बरामदे में कई कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं। इससे अध्यापक नहीं पढ़ा पाते और न ही वे पढ़ाने में रूचि लेते हैं। बरामदे और कमरों में पंखे भी नहीं है। अब तो बारिश के कारण गर्मी से बच्चे काफी परेशान हैं, इससे पहले गर्मी में तो बच्चे बेहाल हो रहे थे। इस समस्या को लेकर स्कूल प्रबंधन कमेटी ने एक शिफ्ट का विरोध किया था। क्योंकि दो शिफ्टों में पढ़ाई आसानी से हो रही थी। नियमों के मुताबिक इस कमेटी का निर्णय मान्य होता है, लेकिन अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। गांव के भूपेंद्र शर्मा भी इस समस्या के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से मिलने गए थे। लेकिन अधिकारी नहीं मिली तो उन्होंने शिकायत कार्यालय में दे दी है।

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इस बारे में खंड शिक्षा अधिकारी मनोज मित्तल का कहना है कि उच्च अधिकारियों ने स्कूल को एक शिफ्ट में चलाने के निर्देश दिए हैं। जिसके कारण स्कूल को एक शिफ्ट में कर दिया गया है। अधिकारियों के आदेशों की पालना की जा रही। वहीं दूसरी तरफ इसका खामियाजा स्कूल के मासूम बच्चों को उठाना पड़ रहा है।

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