दिल्ली एनसीआर में भी लोगों ने परंपरागत रूप से मनाया गया ओणम का त्योहार

Delhi: भारत विविध धर्मों, जातियों तथा संस्कृतियों का देश है। जहां हर त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो ओणम दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु राज्य में प्रमुख रूप से मनाया जाता है। इसे त्योहार को मलयालम में थिरुवोणम कहते हैं। इस त्योहार को बहुत पवित्र त्योहार माना जाता है। दक्षिण […]

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Delhi: भारत विविध धर्मों, जातियों तथा संस्कृतियों का देश है। जहां हर त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो ओणम दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु राज्य में प्रमुख रूप से मनाया जाता है। इसे त्योहार को मलयालम में थिरुवोणम कहते हैं। इस त्योहार को बहुत पवित्र त्योहार माना जाता है। दक्षिण भारत में इस त्योहार को दस दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है।

दिल्ली एनसीआर की ऊंची ऊंची इमारतों में इस त्योहार को पारंपरिक रूप से मनाना बेशक थोड़ा मुश्किल भरा था लेकिन, कई सोसायटियों के लोगों ने एक साथ मिलकर इस त्योहार को पारंपरिक रूप से मनाया।

सेक्टर 16 द्वारका के निवासी प्रभु ने केरल में अपने दादा के साथ उस समय को याद किया जब ओणम समारोह में नाव की सवारी और मुखौटा नृत्य शामिल थे।

राज नगर एक्सटेंशन में रहने वाले कॉलेज के छात्र जेरिन साबू के लिए ओणम कहते हैं कि यह त्योहार उनके दिल के बहुत करीब है। जेरिन कहते हैं कि वे खाने के बहुत शौकीन हैं और ओणम के दौरान अपनी अपनी माँ द्वारा तैयार किए गए केले के पत्ते पर 10-12 व्यंजन खाने के लिए वे काफी उत्सुक हैं।

द्वारका निवासी अखिल ओणम के पीछे का इतिहास बताते हैं और साध्य, पुलिकली और ओनापोटन जैसी परंपराओं के पीछे के महत्व को बताते हैं। ओणम का 10 दिवसीय त्योहार केरल में फसल की कटाई का जश्न मनाता है। परंपरागत रूप से यह त्योहार राक्षस राजा महाबली की घर वापसी का प्रतीक है। महान राजा महाबली अपनी दयालुता और परोपकार के लिए जाने जाते थे। एक आम धारणा यह है कि राजा महाबली केरल में अपने जन्मस्थान पर वार्षिक वापसी करते हैं।

कथा के अनुसार राजा महाबली ने देवताओं को हराकर तीनों लोकों पर अधिकार प्राप्त कर लिया था जिससे देवता उनसे काफी क्रोधित थे। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा महाबली के पास आए और उनसे भिक्षा में तीन पग जमीन की मांग की। महाबली ने उनकी इस इच्छा को स्वीकार कर लिया और उन्हें तीन पग जमीन देने का वचन दे दिया।

वामन रूपी विष्णु भगवान ने दो कदमों में ही दोनों लोकों को नाप दिया तब राजा महबली ने तीसरे कदम के लिए अपना सिर विष्णु भगवान के चरणों में चढ़ा दिया इस बात से विष्णु भगवान बहुत प्रसन्न हुए और राजा महाबलि को हर साल पृथ्वी पर आने की अनुमति दी। तब से यह मान्यता है कि ओणम के त्योहार के दौरान राजा महबलि हर वर्ष पृथ्वी की यात्रा करते हैं।  इसीलिए लोग इस समय अपने राजा का स्वागत करते हैं और साथ ही इस दौरान विष्णु भगवान की पूजा की जाती है।

इस बार ओणम का त्योहार 08 सितंबर को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार ओणम का त्योहार भाद्रपद और आश्विन माह में मनाया जाता है। मलयालम सौर कैलेंडर के अनुसार ओणम का त्योहर चिंगम माह में शिरुवोणम नक्षत्र में माना जाता है। त्योहार से जुड़े अनुष्ठानों में स्नान करना, प्रार्थना करना, पारंपरिक रूप से कपड़े पहनना, फूलों की रंगोली बनाना, जिसे पूकलम के नाम से जाना जाता है, और एक पारंपरिक भोजन तैयार करना शामिल है।

नोएडा निवासी शाजिमोल एबे कहते हैं, “हर साल, हम प्रवेश द्वार पर फूलों की रंगोली बनाते हैं, जिसे हम पूकलम कहते हैं, और हम इसे हर सुबह 10 दिनों तक महाबली के स्वागत के लिए बनाते हैं।”

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