Osteoporosis treatment in hindi : जानिए ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में कुछ ख़ास बातें

Osteoporosis treatment in hindi :ऐसा शायद ही कोई हो, जिसे एक आरामदायक ज़िंदगी अच्छी न लगती हो। यहां तक कि कई लोगों का तो ये मानना है कि आज सभी एक आरामदायक जीवन पाने के लिए ही तो सारी भागदौड़ करते हैं, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी आरामदायक जीवनशैली ने […]

न्यूज़ सेहत

Osteoporosis treatment in hindi :ऐसा शायद ही कोई हो, जिसे एक आरामदायक ज़िंदगी अच्छी न लगती हो। यहां तक कि कई लोगों का तो ये मानना है कि आज सभी एक आरामदायक जीवन पाने के लिए ही तो सारी भागदौड़ करते हैं, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी आरामदायक जीवनशैली ने हमें कई रोगों का शिकार भी बना दिया है। अब ऑस्टियोपोरोसिस को ही ले लीजिए।  न सिर्फ़ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में ही लोग काफ़ी तेज़ी से इसकी चपेट में आ रहे हैं, इसीलिए 20 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस घातक समस्या के प्रति आगाह किया जा सके। यह भी पढ़ें : Stop Eating Junk Food At Night : रात को सोने से पहले इन चीज़ों को खाने से करें परहेज़

क्या है ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)

ऑस्टियोपोरोसिस को हिंदी में अस्थिभंगुरता अथवा भुरभुरा रोग भी कहते हैं। यह हड्डियों से संबंधित एक बेहद संवेदनशील और घातक रोग है, जैसाकि नाम से ही ज़ाहिर है कि इसमें हमारी हड्डियां इतनी कमज़ोर हो जाती हैं कि ज़रा-ज़रा सी चोट भी उनमें फ्रैक्चर का ख़तरा पैदा कर देती है, जिससे उबरना आसान नहीं होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति इस रोग से पीड़ित है, जिनमें महिलाओं की संख्या ज़्यादा है। फिर भी इस बारे में जागरुकता की भारी कमी देखने को मिलती है। यह भी पढ़ें : Health Tips: इन चीजों के खाने से शरीर में नहीं होगी ओमेगा 3 की कमी

ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) के कारण

शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की भारी कमी इस रोग के कारणों में से मुख्य है और इसकी सबसे बड़ी वजह है आजकल की जीवनशैली, जिसके चलते न हम अपने आहार पर पूरी तरह से ध्यान दे पाते हैं और न ही हमारे पास इतना समय होता है कि रोज़ाना नियमित रूप से आधा-पौना घंटा सूरज की रोशनी में बिता सकें, ताकि हमारी हड्डियों के लिए बेहद ज़रूरी विटामिन डी हमें मिल सके। अच्छे खान-पान के नाम पर दूध, दही, घी वग़ैरह की जगह जंक फूड ने ले ली है, जिसके चलते हड्डियों को सही पोषण नहीं मिल पाता और वे कमज़ोर होना शुरू हो जाती हैं। यह भी पढ़ें : Uric acid patient diet chart in hindi : यूरिक एसिड के मरीज हैं तो खानपान पर दें विशेष ध्यान, इन चीजों से करें परहेज

किसे होता है ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)

इस रोग का संबंध उन सभी से है, जो भी हड्डियों की कमज़ोरी की समस्या से जूझ रहे हैं। शुरुआत अर्थोराइटिस से होकर यह रोग बढ़ते-बढ़ते बेहद ख़तरनाक रूप ले लेता है और हड्डियों में भुरभुराहट तक होने लगती है। वैसे तो यह रोग स्त्रियों और पुरुषों दोनों को ही होता है, लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने का ख़तरा और इसकी जटिलता दोनों ही बहुत ज़्यादा होती है। महिलाओं में ख़ासतौर पर 30 की उम्र के बाद हड्डियों के नया बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है, जो कि मेनोपॉज़ के बाद और तेज़ी से प्रभावित होने लगती है। इसके अलावा अगर परिवार में किसी को गठिया, अर्थोराइटिस, ऑस्टोअर्थोराइटिस या ऑस्टियोपोरोसिस जैसा रोग रहा हो तो यह रोग होने की संभावना काफ़ी हद तक बढ़ जाती है। यह भी पढ़ें :  Tips For Eye Care During Monsoon In Hindi : मानसून के दौरान कैसे रखें अपनी आंखों का ख्याल

क्या है ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) से बचाव के तरीके

जैसाकि हमने शुरुआत में बताया कि यह ख़राब जीवनशैली जनित रोग है, इसलिए अगर शुरू से ही अपनी जीवनशैली पर ध्यान दिया जाए तो इस रोग से बचाव संभव है।

  • सबसे पहली ज़रूरत तो अपने खान-पान संबंधी आदतों पर ध्यान देने की है। दूध, दही, घी, ड्राई फ्रूट्स, काले चने, कीवी, नींबू, संतरा, टमाटर, अंडा, मछली आदि को अपने नियमित भोजन का हिस्सा बनाएं।
  • मैग्नीशियम और पोटेशियम युक्त आहार द्वारा भी इस रोग की गंभीरता को कम किया जा सकता है। आलू, केला, मशरूम, अनार आदि में पोटेशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है।
  • साथ ही व्यायाम को नियमित रखें। चाहे आप सिर्फ़ आधा घंटा ही नियमित रूप से व्यायाम करें, लेकिन इसका असर भी आपको अपने स्वास्थ्य पर साफ़ नज़र आएगा।
  • किसी भी प्रकार का भारी व्यायाम अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही शुरू करें, क्योंकि वही आपकी हड्डियों की क्षमता के अनुसार आपको सही सुझाव दे सकते हैं।
  • शारीरिक रूप से जितना सक्रिय रह सकें, उतना ज़्यादा से ज़्यादा रहें, क्योंकि इस रोग में हड्डियों में लचीलापन ख़त्म होकर कठोरता और जड़ता आने लगती है और नई हड्डियों के बनने की रफ़्तार भी काफ़ी धीमी हो जाती है।
  • यदि संभव हो तो रोज़ाना आधा घंटा सुबह की सीधी धूप में ज़रूर बिताएं। उस समय कोशिश करें कि धूप आपके अंगों पर सीधी पड़े। अगर रोज़ाना ऐसा करना कामकाज के चलते संभव न हो पाता हो तो हफ़्ते में कम से कम दो से तीन दिन कुछ देर धूप में ज़रूर रहें। यह शरीर में विटामिन डी की कमी को स्वाभाविक रूप से पूरा कर देगा।
  • तीस साल की उम्र के बाद से समय-समय पर अपनी हड्डियों का चैकअप करवाते रहिए। इसमें बोन डेंसिटी टेस्ट वग़ैरह भी शामिल है। यह टैस्ट आप अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से करा सकते हैं।
  • अपने शरीर के वज़न को हमेशा नियंत्रण में रखिए। किसी भी हालत में अपने वज़न को बढ़ने न दें, क्योंकि यह न सिर्फ़ हड्डियों से संबंधित रोग का कारण बनता है, बल्कि और भी कई रोग इसके चलते पैदा हो जाते हैं। यहां तक कि मोटापा तो ख़ुद अपने-आप में एक रोग है।
  • कोरोना-काल में परिस्थिति के चलते फैली निष्क्रियता के चलते काफ़ी लोगों को अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इनमें से एक प्रमुख रोग ऑस्टियोपोरोसिस भी है। साथ ही आरामतलब जीवनशैली के चलते बढ़ी शारीरिक निष्क्रियता भी इस रोग को बढ़ावा देने का काम करती है।
  • हड्डियों की कमज़ोरी दूर करने के लिए कई तरह के फूड सप्लिमेंट्स भी बाज़ार में उपलब्ध हैं, लेकिन किसी का भी उपयोग आप अपने-आप सीधे तौर पर न करें, बल्कि इसके लिए पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें। उसके बाद ही किसी प्रॉडक्ट को अपनाएं।
  • जो भी आहार आप लें, उसे पूरी तरह से पचाना भी बेहद ज़रूरी है, इसलिए कोशिश करें कि आपका आहार हमेशा ऐसा संतुलित हो, जो ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के साथ-साथ आपके वज़न पर भी कोई दुष्प्रभाव न डाले।
  • बहुत अधिक मोटोपे के साथ-साथ बहुत अधिक दुबलापन भी इस रोग को आमंत्रण देता है, इसलिए हमेशा इस बात पर ध्यान दें कि आपका वज़न हमेशा आदर्श हो।

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