Faridabad: स्मार्ट सिटी को आइनों दिखा रहे हैं शहर और हाइवे के प्रमुख चौराहे

किसी भी शहर के रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, सड़कों और चौराहों को देखकर ही बाहर से आने वाले यात्री उसकी सुंदरता का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन शहर में न तो सड़कों की हालत अच्छी है और न ही कुछ चौराहें देखने लायक हैं।

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Faridabad: किसी भी शहर के रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, सड़कों और चौराहों को देखकर ही बाहर से आने वाले यात्री उसकी सुंदरता का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन शहर में न तो सड़कों की हालत अच्छी है और न ही कुछ चौराहें देखने लायक हैं। नगर निगम अथवा संबंधित विभागों द्वारा समय समय पर शहर के चौराहों का सौंदर्यीकरण करने के दावे भी किये जाते हैं, लेकिन घोषणा के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि फिर भूलकर बैठ जाते हैं। शहर के कुछ चौराहों की हालत दिन पर दिन बद से बदतर होती जा रही है। जिससे लगता है कि शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा सिर्फ नाम के लिए ही दिया गया है। जबकि शहर की हालत स्लम सिटी से भी बदतर है। एनआइटी इलाके के हार्डवेयर चौक, राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बाटा चौक और बल्लभगढ़ चौक की हालत बदतर हो चुकी है। प्रशासन की लापरवाही से इन तीनों चौराहों पर बने गहरे गड्ढों की वजह से वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।

आइना दिखा रहा हार्डवेयर चौक

हार्डवेयर चौक एनआइटी विधानसभा क्षेत्र का मुख्यद्वार माना जाता है। इसके बावजूद इस चौराहे पर नगर निगम के अधिकारी जरा भी ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं। इस चौक की हालत कोई हाल ही में खराब नहीं हुई है। पिछले करीब पांच साल से ज्यादा समय से बुरी स्थिति में है। इस चौराहे पर चारों तरफ बड़े बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जिससे यहां आए दिन लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हो रहे हैं। वहीं आए दिन लोगों के वाहन भी क्षतिग्रस्त है। यह चौक पैरिफेरल रोड का हिस्सा। ठेकेदार द्वारा 102 करोड़ रुपये की लागत से बनी पैरिफेरल रोड के निर्माण के दौरान इस चौराहों को बिना निर्माण के ही छोड़ दिया गया था।

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हादसे से भी सबक नहीं लिया

राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बाटा चौक भी शहर के अति व्यस्त चौराहों में से एक है। राष्ट्रीय राजमार्ग और एनआइटी इलाके को जोडऩे वाला बाटा रेलवे फ्लाईओवर भी इस चौक पर उतरता है। नगर निगम की लापरवाही से बाटा पुल पर तो गहरे गड्ढों का इस चौक से एनआइटी की ओर जाने वाले वाहन चालकों को रोज सामना करना पड़ता है। लेकिन पुल से पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने कई गड्ढे तो फिलहाल जानलेवा बन चुके हैं। इस चौराहे पर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान करीब आठ साल पहले एक मासूम बच्चे पवित्र की गड्ढों के कारण ही जान चली गई थी। जिसका मामला आज भी अदालत में विचाराधीन है। इसे लेकर बच्चे के पिता मनोज वधवा और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन भी चलाया जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद एनएचएआइ द्वारा यहां सडक़ की मरम्मत करवाने की कोई जरूरत महसूस नहीं की जा रही है।

लाखों लोगों को हो रही परेशानी

राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बल्लभगढ़ चौक की हालत भी ऐसी ही है। सोहना रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग को जोडऩे वाले रेलवे फ्लाईओवर पर तो जगह जगह गड्ढे बने हुए हैं, लेकिन पुल उतरने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग चौक की हालत भी बदतर हो चुकी है। इस चौराहे पर जगह जगह सडक़ पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। जो बरसाती पानी भरने पर वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते। जिसकी वजह से यहां अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है। जबकि इस चौराहें से चंद कदमों की दूरी पर बल्लभगढ़ का मैन बाजार, राजा नाहर सिंह मेट्रो स्टेशन और बल्लभगढ़ का बस अड्डा मौजूद है। जिसके कारण यहां अन्य शहरों के लोगों का भी आना जाना लगा रहता है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो

समाजसेवी किशन कुमार का कहना है कि शहर में जमीनी स्तर पर कोई विकास कार्य नजर नहीं आ रहा है। जिससे स्पष्ट है कि नगर निगम अथवा अन्य एजेंसियों द्वारा कागजों में विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। जिसका खामियाजा शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। गड्ढों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए।

समाजसेवी किशन कुमार
समाजसेवी किशन कुमार

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