बिना ऑपरेशन किये ही बदल दिया बुजुर्ग के दिल का वॉल्व

मैरिंगो क्यूआरजी हॉस्पिटल में दिल की गंभीर बीमारी के साथ आये फरीदाबाद के 70 वर्षीय जगदीश कुमार का बिना ऑपरेशन किए दिल का वॉल्व बदल नया जीवन दिया।

Faridabad न्यूज़

Faridabad: मैरिंगो क्यूआरजी हॉस्पिटल में दिल की गंभीर बीमारी के साथ आये फरीदाबाद के 70 वर्षीय जगदीश कुमार का बिना ऑपरेशन किए दिल का वॉल्व बदल नया जीवन दिया।

हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग के डायरेक्टर डॉ. राकेश राय सपरा ने बताया कि हमारे पास एक ऐसा मरीज आया जिसकी सांस फूल रही थी और हाथ-पैरों में सूजन थी। जाँच करने पर पता चला कि उसे गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस की बीमारी थी। मरीज के एओर्टिक वॉल्व में सिकुडऩ थी। इसके अलावा मरीज़ का दिल बहुत कमजोर था। दिल का फंक्शन 25 प्रतिशत था। इस कारण मरीज को बार-बार हार्ट फेलियर हो रहा था। ऐसे में वॉल्व बदलना जरूरी था।

आमतौर पर ऐसी स्थिति में मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ती है। लेकिन इस मरीज की उम्र और हृदय के ज्यादा कमजोर होने की वजह से ऑपरेशन में ज्यादा जोखिम था। इसलिए ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (टीएवीआई) तकनीक से, बिना ऑपरेशन किए, मरीज के दिल का वॉल्व बदल दिया गया। इस प्रोसीजर के बाद मरीज के हृदय ने सामान्य रूप से कार्य करना शुरू कर दिया और स्वस्थ होने के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया।

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डॉ. सपरा ने बताया कि यह केस बहुत चुनौती भरा था। क्योंकि एक तरफ मरीज की उम्र ज्यादा है, दूसरी तरफ, हृदय भी ज्यादा कमजोर हो गया था। पिछले एक साल में मरीज हृदय की इस स्थिति के साथ चार बार कई अलग-अलग हॉस्पिटल में भर्ती हुआ, लेकिन मरीज का ऑपरेशन नहीं हो पाया। क्योंकि मरीज इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता। इस कारण मरीज की किडनी की कार्यप्रणाली में कमी आ रही थी।

मरीज के वॉल्व पर कैल्शियम बहुत ज्यादा जमा था। ऐसे में मरीज की धडक़न खराब होने का खतरा भी ज्यादा होता है। ऑपरेशन करने पर हृदय ब्लॉक होकर पेसमेकर लगाने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे केस के लिए ओपन हार्ट सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन मरीज की जान को जोखिम को देखते हुए हमने मरीज की जांघ की नस से कैथेटर के जरिए वॉल्व को हृदय तक ले जाकर बदल दिया।

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