नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर एसोसिएशन ने किया जनता की थाली का आयोजन

गरमा गरम छोले चावल, अचार और रसगुल्ले मात्र पांच रुपए में परोसा गया

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ग्रेटर नोएडा: एनईएफओडब्ल्यूए (NEFOWA)( नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर एसोसिएशन) ने जनता की थाली का आयोजन किया। जिसकी टैगलाईन थी पांच रुपए की थाली, कोई न जाए खाली। जनता की थाली के अंतर्गत एनईएफओडब्ल्यूए के लोगों ने रविवार 24 अप्रैल को ग्रेटर नोएडा के एक मूर्ति क्षेत्र में गरमा गरम छोले चावल, अचार और रसगुल्ले मात्र पांच रुपए में परोसे।

जनता की थाली का लाभ लगभग 250 लोगों ने उठाया। इस बार का भोजन एनईएफओडब्ल्यूए द्वारा प्रायोजित किया गया था। इस मौके पर टीम की सदस्य तनु भार्गव की शादी की सालगिरह थी। तनु ने बताया कि मैंने और मेरे पति ने जनता की थाली का आयोजन की पहल शादी की चौथी सालगिरह पर शुरू की थी और हमारे इस कार्य में एनईएफओडब्ल्यूए ने समर्थन दिया। वे कहती हैं कि हम सभी को ऐसी पहल करनी चाहिए।

कोविड के लंबे अंतराल के बाद एनईएफओडब्ल्यूए ने जनता की थाली को दोबारा शुरू किया जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को स्वस्थ और स्वादिष्ट भोजन बहुत ही कम कीमत पर मिल सके। ज्योति सिंह ने बताया कि कच्चा माल एनईएफओडब्ल्यूए द्वारा उपलब्ध कराया जाता है, इसके बाद इकोविलेज में खाना तैयार किया जाता है और फिर वितरण के लिए एकमूर्ति सर्किल पर लाया जाता है।

एनईएफओडब्ल्यूए के सदस्य और ईकोविलेज 2 के निवासी राजकुमार कहते हैं कि यह खाना देसी घी में पकाया गया था उसके बाद एकमूर्ति सर्किल पर इसे बांटने के लिए भेजा गया। वहां एनईएफओडब्ल्यूए के सदस्यों ने खाना बांटने में मदद की। वे कहते हैं कि मुझे यह कार्य बेहद पंसद है, हमारे इस कार्य से गरीब और वंचितों को बहुत कम कीमत पर अच्छा खाना मुहैय्या कराया गया।

एनईएफओडब्ल्यूए के एक सदस्य सुमित गुप्ता कहते हैं कि मैं बहुत खुश हूं कि जनता की थाली एक अंतराल के बाद लौट आई है और अंतत: हम दो साल के बाद जरूरतमंदों को सस्ती कीमत पर बढि़या खाना परोस सकते हैं। वे कहते हैं कि एनईएफओडब्ल्यूए का यह कार्य काफी सराहनीय है कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण भोजन लोगों को खुश कर देता है। उन्होंने बताया कि एनईएफओडब्ल्यूए ने जनता की थाली की शुरुआत 2018 से जरूरतमंदो को शुद्ध भोजन परोसने से हुई थी। उनके अनुसार 2018 में नोएडा में केवल कुछ ही रेस्तरां चालू थे। ग्रामीण क्षेत्रों और दूर दराज से आने वाले मजदूरों के लिए खाने का कोई खास विकल्प नहीं था । ऐसे में जनता की थाली ने गरीब मजदूरों को कम कीमत पर उत्तम भोजन प्रदान करके सराहनीय काम किया।

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