Noida- अरुण विहार वार्ड में पारंपरिक रूप से मनाया गया तीज का पर्व

अरुण विहार, सेक्टर 29, वार्ड 7 के निवासियों ने उचित रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक रूप से तीज मनाई।

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Noida: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया का मनाया जाने वाला हरियाली तीज का पर्व महिलाओं के लिए खासा महत्व रखता है। अरुण विहार, सेक्टर 29, वार्ड 7 के निवासियों ने उचित रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक रूप से तीज मनाई। इस अवसर कई निवासी इस तथ्य से खुश थे कि यह पहली बार तीज को पूरे पारंपरिक तरीके से मनाया गया।

वार्ड पार्क में आयोजित समारोह, निवासियों के लिए एक सुखद समय बन गया। समाज के बुजुर्ग जोड़ों ने हाथ पकड़कर शिव पार्वती के लोकगीतों की प्रस्तुति दी, निवासियों ने मिलकर झूलों का आनंद लिया और अपने परिवार और दोस्तों के साथ खूब मस्ती की।

मेंहदी के रंग और लंबी उम्र का चित्रण करते हुए सोसायटी की महिलाओं को हरे रंग के कपड़े पहनाए गए। सोसायटी की रहने वाली प्रतिभा भटनागर ने महिलाओं के स्वागत के लिए हाथ से बने रंग-बिरंगे बैंड बांटे। नब्बे वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक सरोज छाबड़ा ने शिव वंदना के साथ समारोह की शुरुआत की। इसके बाद, जोड़ों ने अपनी शिव पूजा शुरू की और एक साथ पवित्र भजनों का पाठ किया।

इस अवसर पर वार्डवासियों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कुछ ने कविता पाठ किया और मानसून के लोक गीत गाए। एवीआरडब्ल्यूए के अध्यक्ष कर्नल आईपी सिंह और एवीआरडब्ल्यूए की उपाध्यक्ष कविता जमील ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

वार्ड 3 की वार्ड निदेशक (डब्ल्यूडी) दीपा जैन और वार्ड 7 की अन्य महिलाओं ने डांस फ्लोर पर जाकर अपनी प्रस्तुति से शाम का मजा बढ़ा दिया। कई वरिष्ठ नागरिकों ने पहली बार इस तरह डांस किया।

इस कार्यक्रम का आयोजन डब्ल्यूडी – उर्मिल शर्मा ने मधु शर्मा, कर्नल दुष्यंत हुड्डा और चंद्र मान सहित उनकी टीम के साथ किया था।

वार्ड 7 के आयोजक उर्मिल शर्मा कहते हैं, वार्ड प्रबंधन टीम का चार्टर नियमित वार्ड कार्य करने के अलावा वार्ड के लोगों की खुशी को बढ़ाने का भी कार्य करता है, जहां वरिष्ठ नागरिक, एकल महिलाएं और सभी निवासी शांति और सद्भाव के साथ रहते हैं। निवासियों का प्यार और आशीर्वाद दर्शाता है कि हम सही रास्ते पर हैं।

Credits: Supplied

ब्रिगेडियर दीवान कहते हैं, यह अब तक का सबसे अच्छा तीज उत्सव था। यह देखकर अच्छा लगता है कि अभी भी परंपराएं जीवित हैं। हमें अपने पारंपरिक त्योहारों को मनाते रहना चाहिए, क्योंकि वे न केवल हमें खुश करते हैं, बल्कि वे हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं।

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