ग्रेटर नोएडा के अभिभावक स्कूलों में फीस वृद्धि को लेकर हुए सक्रिय

एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन की टीम और ग्रेटर नोएडा वैस्ट के अभिभावकों ने अभी हाल ही में निजी स्कूलों में पांच प्रतिशत की फीस वृद्धि पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी से मुलाकात की। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस विषय से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। बढ़ती महंगाई के […]

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एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन की टीम और ग्रेटर नोएडा वैस्ट के अभिभावकों ने अभी हाल ही में निजी स्कूलों में पांच प्रतिशत की फीस वृद्धि पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी से मुलाकात की। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस विषय से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा।

बढ़ती महंगाई के बीच फीस रेगुलेशन एक्ट के खिलाफ स्कूलों में हो रही फीस बढ़ोत्तरी से परेशान अभिभावकों ने जिलाधिकारी को अपनी इस चिंता तथा इस विषय में आ रही समस्याओं से भी अवगत कराया।

उल्लेखनीय है कि एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन और एनइएफओडब्ल्यूए के सदस्यों ने बीते रविवार 17 अप्रैल को स्कूल में की गई फीस वृद्धि के विरोध में ज़ोरदार प्रदर्शन भी किया था। अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि जब अभी तक महामारी खत्म नहीं हुई है तो ऐसे में राज्य
सरकार ने स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति कैसे दे दी।

एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुखपाल सिंह तूर इस मामले में कहते हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने वादा किया था कि महामारी खत्म होने तक स्कूलों की फीस नहीं बढ़ाई जाएगी। फिर अब सरकार ने निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति कैसे दे दी, जबकि अभी तक कोरोना खत्म नहीं हुआ है। यदि सरकार को लगता है कि कोराना खत्म हो गया तो सरकार ने अभी भी मास्क को अनिवार्य क्यों किया हुआ है। क्या स्कूल की फीस नहीं बढ़ाने का वादा महज़ एक चुनावी हथकंडा मात्र था।

अभिभावक और एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन के सदस्य सागर गुप्ता कहते हैं कि जल्द ही हम सोशल मीडिया पर भी इस विषय में अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे और सरकार से फीस वृद्धि को वापस लेने की अपील करते हुए तेज़ अभियान चलाएंगे।

इस विषय में गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी का कहना था कि इस संबंध में राज्य स्तर से ही कुछ किया जा सकता है।

एक अभिभावक राहुल गर्ग का कहना है कि लगभग सभी निजी स्कूल अपने-अपने परिसर में निजी प्रकाशन की स्टेशनरी और स्कूल ड्रेस बेचकर करोड़ों की कमाई करते हैं। सीएनजी की कीमतों में बढ़ोत्तरी का हवाला देकर स्कूल बस की फीस पहले ही बढ़ाई जा चुकी है। अब दोबारा स्कूलों से बच्चों के संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में हाईब्रिड मोड में पढ़ाई की व्यवस्था की जाए और अभिभावकों की समस्याओं को समझते हुए फीस कम की जाए।

एक अन्य अभिभावक मनीष कुमार का कहना है कि निजी स्कूल केवल अपनी फीस को लेकर चिंतित हैं। उन्हें छात्रों की कोई चिंता नहीं है। 12 साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण अभी शुरू नहीं हुआ है। उन्हें स्कूल भेजना कोरोना को न्यौता देने जैसा है। स्कूलों बसों और यहां तक कि कक्षाओं में भी सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। अब अगर ऐसे में छोटे बच्चे संक्रमित होते हैं तो क्या स्कूल इसकी जिम्मेदारी लेंगे।

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