विकासपुरी में सांस्कृतिक केंद्र की योजना वर्षों बाद भी नहीं चढ़ी परवान

सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकासपुरी में जिला सांस्कृतिक केंद्र की योजना दिल्ली सरकार ने करीब 12 वर्ष पूर्व बनाई थी। अब विकासपुरी के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।

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Delhi: सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकासपुरी में जिला सांस्कृतिक केंद्र की योजना दिल्ली सरकार ने करीब 12 वर्ष पूर्व बनाई थी। जिस जगह सांस्कृतिक केंद्र बनना है, पहले वहां जोहड़ हुआ करती थी। सरकार ने जोहड़ को तो मिट्टी से भर दिया, लेकिन सांस्कृतिक केंद्र बनाना भूल गई। आलम यह है कि अब यहां पेड़-पौधे उग आए हैं। अब विकासपुरी के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। क्षेत्र के विधायक महेंद्र यादव कहते हैं कि यहां निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है। जल्द ही निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक निर्माण शुरू नहीं हो जाता, तब तक उन्हें किसी की बात का भरोसा नहीं है। पूर्व में भी इस तरह की बातें कही जा चुकी हैं।

सभागार, पुस्तकालय सहित अनेक सुविधाएं
सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साहित्य कला परिषद द्वारा जिला सांस्कृतिक केंद्र की योजना तैयार की गई थी। इसमें एक सभागार, परिषद का कार्यालय, पुस्तकालय जैसी सुविधाएं होनी थी। अभी दिल्ली में परिषद का एकमात्र सांस्कृतिक केंद्र जनकपुरी में है, लेकिन भवन में आधी हिस्सेदारी दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की है, यानी विकासपुरी में बनने वाला जिला सांस्कृतिक केंद्र साहित्य कला परिषद का पहला ऐसा केंद्र होता, जिसका पूर्ण स्वामित्व परिषद के पास होता। वर्ष 2009-10 के बजट में केंद्र के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपए का सांकेतिक प्रावधान भी किया गया। फिर भी इस योजना को लंबे समय बाद भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

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ढाई दशक पूर्व भर दिया गया था जोहड़
करीब ढाई दशक पूर्व इस जोहड़ को भर दिया गया था। उस वक्त कई लोगों ने विरोध किया था कि जोहड़ के नहीं होने से काफी दिक्कत होगी। लोगों के विरोध को देखते हुए तब प्रशासन की ओर से यह कहा गया था कि यहां कोई ऐसी सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे क्षेत्र के विकास को मदद मिलेगी। समय-समय पर विकास से जुड़ी कई बातें कहीं गईं, लेकिन अंत में यहां जिला सांस्कृतिक केंद्र बनना तय हुआ।

बना दिया जाए खेल मैदान
विकासपुरी एम ब्लॉक आरडब्ल्यूए के महासचिव अमित त्यागी बताते हैं कि जोहड़ को मिट्टी से भर दिया गया। बाद में इस जगह की चारदीवारी कर दी गई। चारदीवारी किए जाने से पहले कम से कम इस जमीन का इस्तेमाल लोग कर लेते थे, लेकिन अब चारदीवारी के बाद यहां का इस्तेमाल कोई नहीं कर पाता। सरकार ने भी इसे उपेक्षित छोड़ रखा है। कम से कम जब तक यहां कुछ निर्माण शुरू नहीं हो जाता, तब तक यहां खेल का मैदान ही बना दिया जाए, ताकि बच्चे खेल-कूद सकें।

आखिर क्यों ली गई जोहड़ की बलि
विकासपुरी निवासी नवीन का कहना है कि यदि सरकार को यहां कुछ बनाना ही नहीं था तो फिर आखिर एक जोहड़ की बलि क्यों ली गई। यह बड़ा सवाल है। यदि सरकार की यहां कुछ बनाने की मंशा नहीं है तो बेहतर होगा कि इस जगह जोहड़ का ही विकास कर दिया जाए, ताकि यहां बारिश का पानी इकट्ठा हो सके।

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