दिखावे की कार्रवाई से पॉलीथिन बैग पर नहीं लग पा रहा प्रतिबंध

एनजीटी के आदेश पर प्रदेश सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

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Faridabad: एनजीटी के आदेश पर प्रदेश सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यानी अब 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। जिसके तहत जिला प्रशासन द्वारा 30 जून तक लोगों को इस संदर्भ में जागरूक किया जाएगा। इसके बाद एक जुलाई से इस नियम का सख्ती के साथ पालन करवाने की बात कही जा रही है। वैसे भी यह नियम कोई नया नहीं है। इससे पहले भी एनजीटी पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दे चुका है, लेकिन प्रशासन की लापरवाही से सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले के साथ इस्तेमाल हो रहा है। क्योंकि प्रशासन की तरफ से इनका उत्पादन रोकने का प्रयास कभी नहीं किया गया।

उल्लेखनीय है कि उत्पादक सरेआम बाजारों में पॉलीथिन बैग क सप्लाई कर रहे हैं। ऐसे में दुकानदार भी अपने ग्राहकों को टूटने से रोकने के लिए सामान पॉलीथिन बैग में देते हैं। एनजीटी अथवा सरकार की तरफ से सख्ती करने पर नगर निगम अथवा जिला प्रशासन द्वारा छोटे छोटे रेहड़ी वालों के चालान काट कर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया जाता है, लेकिन प्रशासन द्वारा पॉलीथिन बैग का उत्पादन करने वाली इकाईयों और बड़े शोरूमों की तरफ कभी अपना रुख नहीं किया जाता।

प्रतिबंध या सिर्फ दिखावा

अदालत या सरकार की तरफ से पाबंदी लगाने का दबाव आने पर नगर निगम के कर्मचारी कुछ दिनों तक पॉलीथिन बैग के खिलाफ अभियान चलाते हुए नजर आते हैं। इस दौरान कर्मी छोटे मोटे सब्जी की रेहड़ी लगाने वालों और दुकानदारों पर जुर्मान लगाकर अपना कर्तव्य पूरा कर लेते हैं। कुछ दिनों के दिखावे के बाद निगम कर्मी अदालत अथवा सरकार के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल देते है। जिसके बाद फिर से खुलेआम पॉलीथिन की प्रतिबंधित थैलियों का इस्तेमाल शुरू हो जाता है, लेकिन नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अथवा जिला प्रशासन की तरफ से पॉलीथिन बैग का उत्पादन करने वालों और बाजारों में इनकी थोक में बिक्री करने वाले व्यापारियों अथवा सप्लायरों के खिलाफ कभी ठोस कार्रवाई करने की जरूरत महसूस नहीं की जाती। पॉलीथिन बैग आसानी से बाजार में उपलब्ध होने की वजह से इसका खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। पॉलीथिन बैग के प्रचलन को रोकने के लिए प्रशासन को सबसे पहले इसके उत्पादन और आपूर्ति पर पूरी तरह पाबंदी लगानी होगी, लेकिन इस ओर जिला प्रशासन द्वारा ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं की जाती।

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पर्यावरण पर पड़ रहा बुरा असर

पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल का पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। पॉलीथिन बैग से ही शहर में सीवर जाम की समस्या बढ़ रही है। आमतौर पर लोग थैलियों का इस्तेमाल करने के बाद इधर उधर फेंक देते है। जो उडक़र सीधा नालियों और सीवर की पाइप लाइनों में जाकर फंस जाती है। पॉलीथिन नष्ट न होने की वजह से यह नालियों और सीवर लाइन को बुरी तरह जाम कर देता है। निकासी न हो पाने के कारण गंदा पानी नालियों और सीवर के मैनहॉल से ओवरफ्लो होकर सडक़ों पर बहने लगता है। जिससे प्रदूषण का स्तर शहर में तेजी के साथ बढऩे लगता है। कूड़े में पड़ी पॉलीथिन निगलने से बेसहारा गौवंश भी बुरी तरह बीमार हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि बाजार में पॉलीथिन बैग के विकल्प मौजूद नहीं है। पॉलीथिन बैग से पहले परंपरागत कागज के लिफाफों का प्रचलन था। पॉलीथिन के विकल्प के रूप में लिफाफों का इस्तेमाल एक बार फिर शुरू हो गया है। समस्याओं को देखते हुए बड़े दुकानदारों ने नॉन वोवन कैरी बैग इस्तेमाल करने शुरू किए हैं। यह बैग मिट्टी में गल जाता है।

50 प्रतिशत प्लास्टिकका कचरा

पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल रोकने को प्रशासन अथवा नगर निगम ने गंभीरता से प्रयास नहीं किए। जिससे शहर की नालियां और सीवर लाइनें जाम होने की समस्या गंभीर रूप धारण करती जा रही है। शहर में लगने वाले कूड़े के ढेर में करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा पॉलीथिन का कचरा होता है। प्रशासन ने करीब छह महीने पहले डबुआ सब्जी मंडी के मार्केट कमेटी के सचिव कार्यालय में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने को बैठक बुलाई थी। जिसमें मंडी के कुछ प्रमुख आढ़तियों को भी बुलाया गया था। बैठक में निगम के अतिरिक्त आयुक्त इंद्रजीत कुल्हाडिय़ा द्वारा दुकानदारों को पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल न करने के लिए जागरूक किया गया था। मौके पर मौजूद कुछ आढ़तियों ने पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के लिए उत्पादन पर रोक लगाने की सलाह दी थी। मंडी को पॉलीथिन फ्री करने के लिए कुछ समय देने की मांग भी की गई है, लेकिन करीब छह महीने का समय गुजर जाने के बाद न तो डबुआ सब्जी मंडी आज तक पॉलीथिन फ्री हो पाई हैं और न ही प्रशासन या निगम अधिकारियों द्वारा दोबारा इस ओर कभी ध्यान देने का प्रयास किया गया है।

सभी की जिम्मेदारी

सेव फरीदाबाद टीम के सदस्य किशन कुमार का कहना है कि पॉलीथिन बैग के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने का पर्यावरण पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। पॉलीथिन की वजह से नदियां और जंगल दूषित हो रहे है। इस समस्या का खत्मा तभी हो सकता है, जब आम लोग जागरूक हो जाएंगे। इसके लिए सामाजिक संगठनों को भी कदम उठाना होगा। संस्थाओं को पॉलीथिन की थैली के विरोध में आम लोगों को जागरूक करना होगा।

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