बढ़ती महंगाई पर दिल्ली एनसीआर के मध्यम वर्गीय लोगों की प्रतिक्रिया

बढ़ती महंगाई के कारण वैसे ही मध्यम वर्गीय परिवारों का जीवन दूभर है। ऐसे में केंद्र ने आंकड़े जारी किए हैं कि मई 2022 में थोक महंगाई दर 15.08% से बढ़कर 15.88% हो गई है।

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Noida: बढ़ती महंगाई के कारण वैसे ही मध्यम वर्गीय परिवारों का जीवन दूभर है। ऐसे में केंद्र ने आंकड़े जारी किए हैं कि मई 2022 में थोक महंगाई दर 15.08% से बढ़कर 15.88% हो गई है। विगत 14 माह से थोक महंगाई दर दोहरे अंक में है। मई महीने में इन्फ्लेशन रेट (inflation rate)10.50 प्रतिशत रहा। माँस अंडे और सब्ज़ियों की कीमतों में भारी इज़ाफ़ा हुआ। आम आदमी के लिए यह स्थिति काफी परेशानी भरी हो सकती है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि खनिज तेल, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खाद्य उत्पादों, बुनियादी धातुओं और रासायनिक उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का असर मध्यम वर्गीय शहरी नागरिकों की जेब पर पड़ेगा।

इस बढ़ती महंगाई पर जब सिटीस्पाइडी की टीम ने शहरी मध्यम वर्ग के लोगों से बात की तो उनकी प्रतिक्रिया कुछ इस प्रकार रही :

गौर सिटी नोएडा के निवासी शिव शरण कहते हैं, सोसायटी के बाजार में हर सब्जी और फल की कीमत हमेशा स्थानीय बाजारों के मुकाबले 10 से 15 रुपये ज्यादा होती है। ऐसे में अगर इन चीजों की कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है तो इससे उनके मासिक बजट खराब हो जाएगा।

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गौर सिटी, नोएडा की एक अन्य निवासी ललिता तोमर कहती हैं, हमें हमेशा यह सब क्यों झेलना पड़ता है, चाहे वह पेट्रोल की कीमत में वृद्धि हो या सब्ज़ियों और फलों में? कभी-कभी ये चीजें हमारे जीवन को और मुश्किल कर देती हैं और मुझे यह सोचने पर भी मजबूर कर देती हैं कि हम इस तरह की महंगाई से कैसे बचे रहेंगे।

गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन की रहने वाली ममता मलिक सिंगल पेरेंट हैं और उनके पास कई खर्चे हैं। वह कहती हैं, अगर किराने का सामान जैसी बुनियादी चीजों की कीमतों में इतनी अधिक वृद्धि हो जाएगी, तो हमारे पास अन्य खर्चों के लिए बचत करने का कोई तरीका नहीं है। यह हर महीने मेरे पूरे बजट को प्रभावित कर देंगी।

गाजियाबाद के वसुंधरा के रहने वाले संजीव कुमार कहते हैं, पहले पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी और फिर सब्जियों और किराना के दामों में बढ़ोतरी हुई । मैं पेशे से एक ठेकेदार हूं, सब कुछ ठीक से चलने के लिए चीज़ों को उचित मूल्य पर उपलब्ध होना जरूरी है।

दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली शांति यादव कहती हैं, मैं और मेरे पति रिटायर हो चुके हैं। हमारी पेंशन ही आय का एकमात्र ज़रिया है जिससे हम देखते हैं कि हम अपनी जरूरतों को कैसे पूरा करते हैं। हमारे पास देखभाल करने के लिए बच्चे नहीं हैं। इसलिए इस तरह की खबरें हमें चिंतित करती हैं कि महीने की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। हम बीमार भी रहते हैं तो हमारे चिकित्सा के भी खर्चे अधिक हैं।

दिल्ली के शाहदरा के एक स्थानीय सब्जी विक्रेता विपिन कुमार कहते हैं, “मैं एक छोटा सब्जी विक्रेता हूँ जो हर दिन शाहदरा मंडी से सब्जियां खरीदता है और फिर उन्हें गलियों में बेचता है। जब भी सब्ज़ियों या फलों के रेट बढ़ते हैं, तो हमें बड़ी समस्या होती है क्योंकि हमारे नियमित ग्राहक उन्हें खरीदने से इनकार करते हैं।

साहिबाबाद में रहने वाली तान्या चौहान कहती हैं, मैं एक शिक्षिका हूं और मेरी तनख्वाह बहुत अच्छी नहीं है। मैं ही हूं जो अपना सारा खर्च देखती हूं हौर मुझे किराया भी देना पड़ता है। अगर चीज़ों के दाम इसी रफ्तार से बढ़ते रहे तो कैसे मैं जीवन यापन करुँगी और अपने भविष्य के लिए क्या बचत करुँगी ।

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