Dwarka: स्कूलों के आसपास तंबाकू बेचने वालों के खिलाफ कसा जा रहा शिकंजा

Dwarka व आसपास के क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक स्थलों, विशेषकर स्कूल व शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू या इससे जुड़े पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अभियान की शुरुआत की है।

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Dwarka: द्वारका व आसपास के क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक स्थलों, विशेषकर स्कूल व शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू या इससे जुड़े पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अभियान की शुरुआत की है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शुरु किए गए इस अभियान के दो चरण हैं। एक चरण में लोगों से इस बात की अपील की जा रही है कि वे तंबाकू का इस्तेमाल नहीं करें, वहीं दूसरे चरण में स्कूल, अस्पताल व धार्मिक स्थलों के नजदीक तंबाकू बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

अभियान के पहले दिन प्रशासन ने द्वारका सेक्टर-11, सेक्टर-4, सेक्टर-17 में जगह-जगह छापेमारी की कार्रवाई की। इसके अलावा द्वारका सेक्टर-6, सेक्टर-10 में भी छापेमारी की गई।। पहले दिन कुल 12 चालान काटे गए।

अभियान का स्वागत

द्वारका के लोगों ने इस अभियान का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि उपनगरी में कई जगह स्कूली बच्चों को तंबाकू जनित पदार्थ खरीदते देखा जा सकता है। कई बच्चे सिगरेट व तंबाकू का सेवन पार्कों में करते नजर आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्कूलों के आसपास आसानी से ऐसी चीजें उपलब्ध हो जाती हैं। इन्हें बेचने वाले दुकान नहीं बल्कि यूं ही कहीं पेड़ के नीचे साइकिल खड़ी कर देते हैं। साइकिल पर गुटखा, सिगरेट, तंबाकू के पैकेट रखते हैं। इन्हें जैसे ही प्रशासन द्वारा कार्रवाई की भनक लगती है, ये फरार हो जाते हैं। द्वारका लोक कल्याण मंच के अध्यक्ष डीपी वाजपेयी का कहना है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ मुहिम हमेशा चलाया जाना चाहिए। सेक्टर 11 निवासी टीसी सागर का कहना है कि दुकानदार किशोरों को किसी भी हालत में तंबाकू युक्त पदार्थ नहीं दें, इस बात के लिए प्रशासन को दुकानदारों से बात करनी चाहिए।

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लोगों को किया जागरूकता

द्वारका सेक्टर 6 स्थित मणिपाल हॉस्पीटल में जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम जुटी थी। यहां टीम ने लोगों को बताया कि तंबाकू सेवन के कारण मुंह, गले, फेफड़े, प्रोस्टेट और पेट का कैंसर हो सकता है। इसके अलावा तंबाकू ब्रेन ट्यूमर का भी बड़ा कारण है। तंबाकू के धुएं से निकलने वाले पांच सौ हानिकारक गैस व सात हजार अन्य रासायनिक पदार्थ पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी डा. विमल कौशल ने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है। डब्ल्यूएचओ की मानें तो सिगरेट निर्माण के लिए हर वर्ष 600 मिलियन पेड़ों को काटा जाता है और सिगरेट बनाने के लिए 22 बिलियन लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा निर्माण प्रक्रिया के दौरान 84 मिलियन टन कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जित होता है।

क्या कहता है नियम

तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) 2003 की धारा चार के तहत सार्वजनिक स्थानों (होटल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड, कार्यालय, विद्यालय, कालेज, पार्क आदि सभी सार्वजनिक स्थानों) पर सिगरेट, बीडी या किसी अन्य ढंग से धूम्रपान पर प्रतिबंध है।

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