फरीदाबाद में पहले दिन भी नहीं लग पाया सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध

इस महीने की समय अवधि के दौरान प्रशासन और नगर निगम की तरफ से सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने और लोगों को जागरूक करने के लिए सिर्फ दिखावे के ही प्रयास किये गए हैं। इस दौरान शहर में चंद रेहड़ी वालों और छोटे दुकानदारों के चालान ही काटें गए हैं।

Faridabad न्यूज़

Faridabad: सिंगल यूज प्लास्टिक (Single use plastic) पर खास कर पॉलीथिन बैग पर्यावरण के लिए लगातार खतरनाक साबित होते जा रहे हैं। पॉलीथिन बैग और अन्य सिंगल प्लास्टिक के सामन की वजह से नदी नाले तक प्रदूषित होकर जाम हो रहे हैं। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने इन चीजों पर एक जुलाई से पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के आदेश दिये थे। गत एक महीने के दौरान एनजीटी ने प्रशासन को इस ओर ठोस कदम उठाने और लोगों को जागरूक करने के आदेश दिये थे। लेकिन इस महीने की समय अवधि के दौरान प्रशासन और नगर निगम की तरफ से सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने और लोगों को जागरूक करने के लिए सिर्फ दिखावे के ही प्रयास किये गए हैं। इस दौरान शहर में चंद रेहड़ी वालों और छोटे दुकानदारों के चालान ही काटें गए हैं।

जबकि सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन बैग से जुड़ी यूनिटों और बड़े व्यापारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया। जिसके परिणाम स्वरूप शहर के बाजारों और सब्जी मंडियों में पॉलीथिन बैग का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। प्रतिबंध लगाए जाने के पहले दिन भी प्रशासन की तरफ कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस नहीं की।

लगातार बढ़ा पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल

पॉलीथिन बैग का प्रचलन करीब चार दशक पहले शुरू हुआ था। सस्ता और सुलभ होने से धीरे धीरे बढ़ता ही चला गया। अब बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होना शुरू हो चुका है। जिसका सीधा असर पर्यावरण पर दिखना शुरू हो गया है। ऐसा नहीं है कि बाजार में पॉलीथिन बैग के विकल्प मौजूद नहीं है। अब बाजार में इसके कई विकल्प आ चुके हैं। पॉलीथिन बैग से पहले परंपरागत कागज के लिफाफों का प्रचलन था। पॉलीथिन के विकल्प के रूप में लिफाफों का इस्तेमाल एक बार फिर शुरू हो गया है। समस्याओं को देखते हुए बड़े दुकानदारों ने नॉन वोवन कैरी बैग इस्तेमाल करने शुरू किए हैं। यह बैग मिट्टी में गल जाता है। इसे प्लास्टिक बैग के विकल्प के रूप में तैयार किया गया है। इसके अलावा जूट, कपड़े और कागज से बने बैग भी उपलब्ध हैं। सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार लोगों को कपड़े के बैग इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहां तक कि कई संस्था निशुल्क कपड़े के बैग वितरित करने का काम भी करती रही है।

ये भी पढ़ें: वर्ल्ड गेम्स इनलाइन हॉकी में फरीदाबाद के तीन खिलाड़ियों का चयन

प्रतिबंध का नजर नहीं आया असर

आज से सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं और 120 माइक्रोन से कम मोटाई के पॉलीथिन बैग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के आदेश एनजीटी ने दिये हैं। इन प्रतिबंधित चीजों का इस्तेमाल करने पर भारी भरकम जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान किया गया है। एनजीटी के आदेशों को आए करीब एक महीने से ज्यादा समय गुजर चुका है, लेकिन इस दौरान नगर निगम अथवा जिला प्रशासन द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं और पॉलीथिन बैग का उत्पादन या आपूर्ति को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रतिबंध के पहले दिन ही सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान की दुकानें बाजारों में सजी हुई नजर आई। कई जगह सप्लायर दुकानदारों को पॉलीथिन बैग की आपूर्ति करते हुए नहर आए। वहीं शहर के बाजारों में अनेक दुकानदार प्रतिबंधित पॉलीथिन बैग में रखकर सामान ग्राहकों को देते हुए दिखाई दिये। प्रतिबंधित पॉलीथिन बैग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता हुआ शहर की सब्जी मंडियों में नजर आया। बड़ी सब्जी मंडियों में तो दुकानदार सरेआम पॉलीथिन बैग बेचते नजर आए। मंडियों में सब्जी पॉलीथिन बैग आ रही थी।

स्वच्छता में सबसे बड़ी बाधा पॉलीथिन

पॉलीथिन बैग के बड़े पैमान पर लगातार इस्तेमाल किए जाने का काफी नुकसान हो रहा है। पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल का सबसे ज्यादा पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। पॉलीथिन बैग हजारों सालों तक नष्ट नहीं होती। ऐसे में उनकी वजह से जमीन तक बंजर हो जाती है। इसके साथ पॉलीथिन स्वच्छता के लिए भी सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है।  पॉलीथिन बैग की वजह से शहर में सीवर जाम की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। आमतौर पर लोग इन थैलियों का इस्तेमाल करने के बाद इधर उधर फेंक देते है। जो उडक़र सीधा नालियों और सीवर की पाइप लाइनों में जाकर फंस जाती है। पॉलीथिन नष्ट न होने की वजह से यह नालियों और सीवर लाइन को बुरी तरह जाम कर देता है। जिससे पानी की निकासी न हो पाने के कारण गंदा पानी नालियों और सीवर के मैनहॉल से ओवरफ्लो होकर सडक़ों पर बहने लगता है। जिससे प्रदूषण का स्तर तेजी के साथ बढ़ने लगता है। शहर के तमाम कूड़े के ढेर पर भारी मात्रा में पॉलीथिन पड़ी नजर आती है। जिन्हें निगल जाने से बेसहारा गौवंश भी बुरी तरह बीमार हो रहे हैं।

खुद भी होना होगा जागरूक

भारतीय प्रवासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय तिवारी का कहना है कि पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल के लिए काफी हद तक आम लोग भी जिम्मेदार हैं। यदि वे अपने घरों से बैग लेकर साथ चलेंगे तो और दुकानदार भी पॉलीथिन बैग रखना बंद कर देंगे। सामाजिक संस्थाओं को पॉलीथिन की थैली के विरोध में आम लोगों को जागरूक करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.