नहर पार को ग्रेटर फरीदाबाद तो बना दिया लेकिन स्थिति वहां बदतर

स्मार्ट सिटी की तरह एफएमडीए के पास भी अपना स्टाफ नहीं है। जिसके कारण ग्रेटर फरीदाबाद की हालत बद से बदतर हो चुकी है।

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Faridabad: पूरे शहर के समुचित विकास के लिए सरकार ने जीएमडीए के बाद एफएमडीए (फरीदाबाद महानगर डवलपमेंट ऑथोरिटी) का गठन किया है। इसके अलावा सरकार ने नहरपार इलाके के नाम से जाने वाले क्षेत्र का मॉडर्न नाम ग्रेटर फरीदाबाद रख दिया है, लेकिन ग्रेटर फरीदाबाद की स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार अथवा एफएमडी की तरफ से कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस नहीं की। स्मार्ट सिटी की तरह एफएमडीए के पास भी अपना स्टाफ नहीं है। जिसके कारण ग्रेटर फरीदाबाद की हालत बद से बदतर हो चुकी है। नहर किनारे गुजर रही पूरी सडक़ सीवर के गंदे पानी से भरी हुई। इस सडक़ किनारे बनी नर्सरियों में भी सीवर का गंदा पानी भर चुका है। सीवर लाइनों का पानी यहां हर समय लीक होकर जमीन में बहता रहता है। गांव बादशाहपुर स्थित एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है। जिसके कारण ग्रेटर फरीदाबाद की सोसायटियां टैंकर पर निर्भर हैं। टैंकर चालक सोसायटियों से रोज सैंकड़ों टैंकर सीवर का गंदा पानी भर कर नहर और खुले मैदानों में फेंक रहे हैं। जिससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

एसटीपी बंद होने से हालत नारकीय

ग्रेटर फरीदाबाद में सीवर की समस्या का मूल कारण है बदशाहपुर स्थित एसटीपी प्लांट। यह लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है। वैसे भी लाइन एसटीपी प्लांट से कनेक्ट नहीं है। जिसका पूरा फायदा ग्रेटर फरीदाबाद में सक्रिय सेफ्टी टैंकर माफियाओं को मिल रहा है। सोसायटियों से हर रोज दर्जनों की संख्या में सीवर के पानी से भरे टैंकर निकलते हैं। इसके बदले में सोसायटी वासियों को हर महीने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है, लेकिन यह टैंकर माफिया इसे किसी एसटीपी प्लांट में नहीं पहुंचाते। यह लोग लंबे समय से ग्रेटर फरीदाबाद में बने करीब दर्जनभर बड़े बड़े गड्ढों को सीवर के पानी का तालाब बना चुके हैं। वहीं काफी संख्या में टैंकर चालक सीवर के गंदे पानी को आगरा और गुरूग्राम नहर में सरेआम बहा रहे हैं। जिससे पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। वहीं सोसायटी वासियों द्वारा समस्याओं को लेकर राजनेताओं से लगातार शिकायत की जा रही है लेकिन वे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं देते। हालांकि एफएमडीए के गठन के बाद ग्रेफ के लिए बड़े दावें किए हैं, लेकिन वह कब पूरे होंगे यह देखने वाली बात है।

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एनजीटी के आदेशों की धज्जियां

मास्टर रोड के निर्माण से पहले यहां खनन माफियाओं का कब्जा था। इन माफियाओं द्वारा यहां से बड़े पैमाने पर मिट्टी चोरी कर अन्य स्थानों पर ले जायी गई थी। मास्टर रोड के निर्माण के दौरान ठेकेदार ने भरत ठीक तरीके से नहीं करवाई थी। जिससे सडक़ धंसने की समस्या खड़ी हुई है।  एनजीटी के नियमों के मुताबिक इस तरह से खुले में सीवर का पानी बहाने पर पूरी तरह पाबंदी है। सीवर का गंदा पानी भरा होने से यहां जहां एक तरफ ग्रीनबेल्ट विकसित नहीं हो पाई है। इस तरह से सीवर का गंदा पानी बहाने पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है, लेकिन यहां सरेआम सीवर का पानी बहने से एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ रही है। कई सालों से सीवर का पानी बहने से यह गंदा पानी लगातार भूजल को भी जहरीला बना रहा है। इस गंदे पानी की झील के आसपास कई सोसायटियां भी हैं। जिनमे हजारों की संख्या में लोग रहते है। इस गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध और मच्छरों के प्रकोप से लोगों को भारी परेशानी हो रही है।

नाम नहीं काम दिखाना होगा

ग्रेटर फरीदाबाद निवासी एके गौड का कहना है कि सरकार ने नाम तो बदल दिया पर स्थिति वही पुरानी है। कई सालों से सीवर का पानी जमीन और नहर में डाल रहे हैं, लेकिन नगर निगम को इससे कोई लेना देना नहीं है। सीवर का पानी जमीन में जाकर पर्यावरण के लिए भी खतरा बन रहा है।

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