ग्रेटर फरीदाबाद में आसमान छू रही इमारतों में आग बुझाने का नहीं है इंतजाम

फायर ब्रिगेड के पास इन बहुमंजिला इमारतों में लगने वाली आग को बुझाने के लिए संसाधन के नाम पर कुछ भी नहीं है, जबकि निगम की तरफ से करोड़ों रुपए का फायर टैक्स भी वसूला जाता है।

Faridabad न्यूज़

Faridabad: ग्रेटर फरीदाबाद की बहुमंजिला इमारतों और शहर के विभिन्न हिस्सों में आए दिन होने वाली आग लगने की घटनाओं के लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार है? ग्रेटर फरीदाबाद की विभिन्न सोसायटियों में आसमान को छूने वाले बड़े बड़े टावरों में हजारों की संख्या में फ्लैटों का निर्माण हो चुका है, लेकिन दूसरी तरफ फायर ब्रिगेड के पास इन बहुमंजिला इमारतों में लगने वाली आग को बुझाने के लिए संसाधन के नाम पर कुछ भी नहीं है, जबकि निगम की तरफ से करोड़ों रुपए का फायर टैक्स भी वसूला जाता है। निर्माण के बाद इन इमारतों को कम्पलीशन सर्टिफिकेट डीटीपी की तरफ से जारी किया जाता है। वहीं अग्रिशमन उपकरणों की जांच पड़ताल करने के बाद फायर ब्रिगेड द्वारा एनओसी जारी की जाती है, जबकि इन इमारतों में सुरक्षा के लिहाज से कई तरह की खामियां आए दिन उजागर होती रहती है। वहीं दूसरी तरफ बहुमंजिला इमारतों में लगे अग्निशमन उपकरणों की पोल नवंबर 2021 में दो टावरों में लगी आग ने खोल कर रख दी थी। कई कालोनियां की गलियां इतनी सकंरी है कि आग लगने पर वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घुस ही नहीं पाती। इसके बावजूद इन कालोनियों में विभिन्न तरह की व्यवसायिक गतिविधियां खुलेआम चलाई जा रही है।

आंखें बंद कर जारी करते हैं एनओसी

बहुमंजिला इमारतें हो या अन्य औद्योगिक एवं व्यवसायिक संस्थान सभी भवन का इस्तेमाल करने से पहले फायर ब्रिगेड से एनओसी लेनी जरूरी होती है, लेकिन शहर की ज्यादातर निजी इमारतें तो दूर सरकरी विभागों के पास भी एनओसी नहीं है। जहां विभिन्न कारणों से एनओसी जारी करवाना जरूरी होता है, वहां दलाल सक्रिय हो जाते हैं। भवन मालिक अथवा बिल्डर अपनी माथापच्ची और कम खर्च में एनओसी जारी करवाने के लिए काम दलालों को सौंप देते हैं। यह दलाल व्यक्ति से अग्निशमन उपकरण उपलब्ध करवाने से लेकर एनओसी जारी करवाने का ठेका ले लेते हैं। उपकरण उपलब्ध करवाने और उन्हें स्थापित करने के नाम पर यह लोग सिर्फ दिखावे के लिए ही खानापूर्ति करते हैं। ग्रेटर फरीदाबाद की ज्यादातर इमारतों में सेंसर तक नहीं लगाए गए है। यदि सेंसर होते तो आग लगते ही पता लग जाता, लेकिन इसके बावजूद फायर ब्रिगेड के अधिकारी निजी स्वार्थ के लिए आंखें बंद करके बिल्डरों अथवा अन्य भवन मालिकों को एनओसी जारी कर देते हैं। आने वाले दिनों में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

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फायर ब्रिगेड के प्रति बेरुखी

औद्योगिक नगरी के ज्यादातर रिहायशी इलाके घनी आबादी वाले हैं। शहर में करीब 25 लाख से ज्यादा आबादी रहती हैं। औद्योगिक नगरी होने की वजह से हर इलाके में छोटे बड़े कारखाने भी चल रहे हैं। ऐसे में आए दिन शहर के किसी न किसी हिस्से में आग लगने की घटनाएं भी होती रहती है। दीपावली के आसपास और गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं काफी ज्यादा बढ़ने लगती है लेकिन इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी फायर ब्रिगेड की तरफ ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं कर रहे है। जिसके कारण जिले की फायर ब्रिगेड की हालत दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। फायर ब्रिगेड नगर निगम के अंर्तगत आता है। लेकिन अधिकारी तो दूर आम जनता द्वारा चुन कर सदन में भेजे गए पार्षद भी फायर ब्रिगेड को मजबूत करने की मांग कभी भी सदन में उठाने की जरूरत महसूस नहीं करते। यदि पार्षद प्रयास करते तो शहर की फायर ब्रिगेड भी मजबूत स्थिति में हो सकती थी। ऐसे में आए दिन लगने वाली आग से लाखों रुपये की सम्पत्ति जल कर नष्ट होने से बच सकती है।

यहां नहीं पहुंच सकती फायर ब्रिगेड

शहर में अनेक रिहायशी इलाकों गलियां बेहद सकंरी है। इनमें फायर ब्रिगेड तो दूर छोटे वाहन तक नहीं पहुंच पाते है। ऐसी गलियां ओल्ड फरीदाबाद की कई कालोनियों, सराय ख्वाजा, पल्ला, बल्लभगढ़ की कई कालोनियां, संजय कालोनी, जवाहर कालोनी, पर्वतीय कालोनी, नंगला एन्कलेव, नंगला रोड, जवाहर कालोनी खड़ बी, डबुआ कालोनी, एसी नगर, राहुल कालोनी, जीवन नगर, गौंछी, सरूरपुर और अन्य कई इलाकों में मौजूद है। इन तमाम रिहायशी इलाके में धड़ल्ले के साथ अवैध फैक्ट्रियां चलाई जा रही है। इनमें से अनेक कंपनियों में रबड़, प्लास्टिक और ज्वलंनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ समय पहले ही एनएच तीन स्थित रिहायशी इलाके में चल रही एक रबड़ कंपनी में आग लग गई थी। गनीमत यह रहा, उस समय में फैक्ट्री के मजदूर भोजन अवकाश के लिए बाहर निकल गए थे। करीब दो साल पहले गौंछी इलाके में स्थित एक मकान में शॉर्ट सर्किट से आग लगने पर सकंरी गली होने की वजह से फायर ब्रिगेड नहीं पहुंच पाई थी। ऐसे में स्थानीय लोगों ने खुद ही किसी तरह आग पर काबू पाया था। ऐसे मामले आए दिन शहर में देखने को मिलते हैं।

नहीं है हाईड्रोलिक प्लेटफार्म

समाजसेवी एवं ग्रेटर फरीदाबाद के निवासी एके गौड ने बताया कि तीन साल पहले मुम्बई की घटना को देखकर यहां की स्थिति के बारे में जानने के लिए आरटीआई दायर की तो पता चला कि फायर ब्रिगेड के पास बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाने के संसाधन नहीं है। जिसके बाद उन्होंने स्थानीय निकाय विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखा था। उन्होंने जबाव में बताया था कि वर्ष 18-19 के बजट में दो हाईड्रोलिक प्लेटफार्म खरीदने के आदेश दिये गए हैं। लेकिन आज तक फायर ब्रिगेड को यह उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

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