साइकिल ट्रैक के अभाव में बेमानी साबित हुआ विश्व साइकिल दिवस

साइकिल पर चलने वाले इन मजदूरों की सुरक्षा के लिए शहर में साइकिल ट्रेक का नामो निशान तक नहीं है।

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Faridabad: एक तरफ सरकार प्रदेश को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए नए नए अभियान चला रही है। इसी कड़ी में तीन जून को विश्व साइकिल दिवस पर लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह साइकिल का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं दूसरी तरफ जिला उपायुक्त द्वारा हर बुधवार को कार फ्री डे मनाते हुए साइकिल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करने के सभी प्रयास औद्योगिक नगरी में बेमानी साबित हो रहे हैं, क्योंकि औद्योगिक नगरी के हजारों कारखानों में काम करने वाले लाखों मजदूर आज भी साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं, लेकिन साइकिल पर चलने वाले इन मजदूरों की सुरक्षा के लिए शहर में साइकिल ट्रेक का नामो निशान तक नहीं है।

छह साल पहले सेक्टर 11-12 की डिवाइडिंग रोड पर साइकिल ट्रेक बनाया गया था। जो लोगों के कब्जों और देखरेख के अभाव में जर्जर हो गया। रही सही कसर एफएमडीए ने सडक़ के निर्माण के दौरान पूरी कर दी। वहीं करोड़ों रुपये खर्च करके भी पेरिफेरल रोड पर साइकिल ट्रैक का निर्माण नहीं करवाया गया। स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शहर में साइकिल ट्रैक बनाने की योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।

व्यर्थ गए 25 लाख रुपये

सेक्टर 12 स्थित खेल परिसर में अभ्यास करने के लिए आने वाले खिलाडिय़ों की सुरक्षा और आसपास के सेक्टरों में रहने वाले लोगों के लिए एचएसवीपी ने वर्ष 2016 में सेक्टर 11-12 की डिवाइडिंग रोड पर हाइवे से बाइपास रोड पर तक कई किलोमीटर लंबी और पांच फुट चौड़े साइकिल ट्रैक का निर्माण करवाया था। साइकिल ट्रैक के निर्माण में 25 लाख रुपये खर्च हुए थे। उद्घाटन के बाद कुछ दिनों तक तो साइकिल ट्रैक का इस्तेमाल किया गया। लेकिन इसके बाद एचएसवीपी ने साइकिल टे्रक पर ध्यान देना बंद कर दिया। देखरेख के अभाव में ट्रैक पर कंटीली झाडिय़ां और घास उग गई थी। साइकिल ट्रैक टूट जाने के कारण अब चलने लायक नहीं रह गई थी। अब रही सही कसर एफएमडीए ने पूरी करते हुए सडक़ निर्माण के दौरान ट्रैक पर मलवा डाल दिया है। जिससे साइकिल चालक अथवा सुबह सेहत के लिए साइकिल चलाने वाले लोगों को मजबूरी में सडक़ पर साइकिल चलानी पड़ती है। ऐसे में हर समय सडक़ दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

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स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड ने ballabhgarh-sohna रोड पर बनाया था साइकिल ट्रैक

सिरे नहीं चढ़ी ट्रैक की योजना

साइकिल ट्रैक के अभाव में साइकिल चालक आए दिन सडक़ दुर्घटनाओं का शिकार होते रहते हैं। जिसे ध्यान में रखते हुए समय समय पर साइकिल ट्रैक के निर्माण की योजनाएं भी बनती रही है। नगर निगम ने 102 करोड़ रुपये से बनी पेरिफेरल रोड के निर्माण के साथ साइकिल ट्रैक बनाने का भी ठेका दिया था। ठेकेदार द्वारा इस सडक़ के निर्माण में कई तरह की लापरवाही तो बरती ही है। साथ ही साइकिल ट्रैक का निर्माण भी नहीं करवाया। इस सडक़ की विजिलेंस जांच लंबित पड़ी हुई है। वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड ने मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास की सडक़ों पर साइकिल ट्रैक बनाने की योजना बनाई थी। प्रयोग के तौर पर स्मार्ट सिटी द्वारा सेक्टर 24 के निकट सोहना रोड पर कॉन लगाकर अस्थाई साइकिल ट्रेक भी बनाया गया था। लेकिन करीब एक महीने तक दिखावा करने के बाद साइकिल ट्रैक का निर्माण तो दूर अस्थाई साइकिल ट्रैक को भी हटाया लिया गया।

102 करोड़ की लागत से बने पेरिफेरल रोड पर नहीं बनाई गई साइकिल ट्रैक

साइकिल ट्रैक की बेहद जरूरत

सेक्टर 11-12 के बाद सेक्टर 12-15 की डिवाइडिंग रोड पर भी साइकिल ट्रैक बनाने की योजना थी, लेकिन इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जबकि यहीं नहीं शहर के अन्य इलाकों में भी साइकिल ट्रैक की बेहद जरूरत है। औद्योगिक क्षेत्र, सेक्टर 24, सेक्टर 25 और सरूरपुर में हजारों मजदूर छोटे बड़े कारखाने हैं। इन औद्योगिक क्षेत्रों के किसी भी रास्ते पर साइकिल ट्रैक नहीं है। सरकार ने इन रास्तों पर साइकिल ट्रैक बनाने की कभी जरूरत भी महसूस नहीं की। इसके अलावा बल्लभगढ़ के आईएमटी, मथुरा रोड, बाइपास रोड, सेक्टर 27, सेक्टर छह और अन्य कई स्थानों पर स्थित औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जाने वाली सडक़ों पर कहीं भी साइकिल ट्रैक की व्यवस्था नहीं है। एनआईटी के पैरीफेरल रोड पर ठेकेदार की लापरवाही से साइकिल ट्रैक आज तक नहीं बन पाया, लेकिन निगम ने भी इस रोड पर साइकिल ट्रैक बनवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। इन इलाकों में साइकिल ट्रैक के अभाव में आए मजदूर दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं।

मजदूरों की सुरक्षा का सवाल

सडक़ सुरक्षा संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष एसके शर्मा का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर में खासकर औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जाने वाली सडक़ों पर साइकिल ट्रैक बनाने की बेहद जरूरत है। साइकिल ट्रैक के अभाव में साइकिल सवार मजदूरों की जान जा रही हैं। मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

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