विध्वंस के बाद, एडिफिस इंजिनियरिंग ने मलबा साफ करने के लिए कसी कमर

नोएडा। रविवार, 28 अगस्त, 2022 को दोपहर ठीक 2:30 बजे बहुमंजिला सुपरटेक ट्विन टावरों को धराशायी कर दिया गया। दिल्ली की कुतुब मीनार से भी ऊंची 100 मीटर ऊंची इमारत को गिराने के लिए वाटरफॉल विधि का उपयोग किया गया जिससे मात्र 9 सेकंड में ये टॉवर्स धराशायी हो गए। अब नोएडा के अवैध ट्विन […]

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विध्वंस के बाद, एडिफिस इंजिनियरिंग ने मलबा साफ करने के लिए कसी कमर

नोएडा। रविवार, 28 अगस्त, 2022 को दोपहर ठीक 2:30 बजे बहुमंजिला सुपरटेक ट्विन टावरों को धराशायी कर दिया गया। दिल्ली की कुतुब मीनार से भी ऊंची 100 मीटर ऊंची इमारत को गिराने के लिए वाटरफॉल विधि का उपयोग किया गया जिससे मात्र 9 सेकंड में ये टॉवर्स धराशायी हो गए। अब नोएडा के अवैध ट्विन टॉवर्स के स्थान पर कंक्रीट के मलबे, स्टील और लोहे की छड़ों का ढेर है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 90 दिनों के अंदर मलबा हटाना है। एडिफिस इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर, मयूर मेहता ने बताया कि साइट पर लगभग 80,000 मीट्रिक टन मलबा एकत्र किया गया है। प्राधिकरण के कर्मचारियों के साथ आस-पास के भवनों एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज के आसपास के कचरे को साफ करने का काम शुरू हो गया है।

वह कहते हैं, नोएडा अथॉरिटी के करीब 150 कर्मचारी और 60 एडिफिस के कर्मचारी मौके पर हैं। मलबा हटाने का काम शुरू हो गया है। यहां 50,000 मीट्रिक टन बेसमेंट में और लगभग 25,000 से 30,000 टन सेक्टर-80 स्थित नोएडा अथॉरिटी के सीएनडी वेस्ट प्लांट में जाएगा।

वह आगे कहते हैं, ”हम मलबा हटाने के समय आसपास के भवनों के आरडब्ल्यूए से बात करेंगे ताकि कोई गड़बड़ी न हो.”

उन्होंने यह भी कहा कि एडिफिस इंजीनियरिंग टीम विध्वंस लागत को आंशिक रूप से वसूल करने के लिए कम से कम 4,000 टन लोहे और स्टील (मलबे से) का उपयोग करेगी।

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