Mussoorie के लंढौर में रखे कूड़ेदान, जिन पर लिखी पंक्तियों में है दर्शन का ख़ज़ाना

लंढौर मसूरी की एक बस्ती है, जिसके ऊपर एक चोटी है। चोटी के शीर्ष पर लाल टिब्बा नामक एक स्थान है, जिसके केंद्र में एक टेलीविजन स्टेशन है।

घुमक्कड़ी न्यूज़ साहित्य

“थोड़ी देर बैठकर सोचने से कभी न डरें।” यह एक ऐसी दार्शनिक लाइन थी, जिसने मुझे रुककर थोड़ी देर सोचने पर मजबूर कर दिया। आपको जानकर हैरत होगी, मैंने यह लाइन मसूरी के लंढौर में आराम से चहलकदमी करने के दौरान एक कूड़ेदान पर लिखी देखी। जब मैंने इस कूड़ेदान पर लिखी पंक्ति को पढ़कर आत्मसात कर लिया तो मैं आगे बढ़ गया। इसी दौरान मुझे एहसास हुआ कि रास्ते में कचरे के और भी ऐसे कई डिब्बे हैं, जिन पर ऐसी ही दर्शन की गहरी बातें लिखी हुई हैं।

लंढौर मसूरी की एक बस्ती है, जिसके ऊपर एक चोटी है। चोटी के शीर्ष पर लाल टिब्बा नामक एक स्थान है, जिसके केंद्र में एक टेलीविजन स्टेशन है। लाल टिब्बा पहाड़ी के सामने दुकानें हैं, जो काफी मशहूर हैं, जहां बहुत से पर्यटक आते हैं और वॉफल और मोमोज़ खाने का आनंद लेते हैं।

यहां एक सड़क है, जो चार दुकान से शुरू होती है और लाल टिब्बा पहाड़ी के चारों ओर एक पूर्ण चक्कर बनाती है और वापस चार दुकान पर आती है। करीब करीब डेढ़ किलोमीटर का यह चक्कर आपके लिए एक सुखद सैर साबित हो सकता है।

Credit: CitySpidey

यहां एक समतल सड़क है, जहां आप सैर कर सकते हैं। यहां से आपको हरे-भरे पहाड़ों के आकर्षक नज़ारे दिखाई देते हैं। यहां की सैर की दौरान अधिकतर आप रोडोडेंड्रोन पेड़ों की छाया में ही रहते हैं। यहां पर कुछ पुराने बंगले और कब्रिस्तान हैं और कुछ पुरानी धरोहर सरीखे चर्च भी हैं। साथ ही प्रसिद्ध बंगाली अभिनेता विक्टर बनर्जी का प्रतिष्ठित घर है, जो ब्रिटिश काल की याद दिलाता है।

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फुर्सत के पलों में सैर के साथ-साथ दर्शनशास्त्र की लाइनों का आनंद लेने के लिए यह एक आदर्श स्थान साबित हो सकता है।

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मज़े की बात यह है कि ये दर्शन की लाइनें प्राधिकरण द्वारा कूड़ेदानों पर बहुत सोच-समझकर लिखी गई हैं। कचरे के डिब्बों पर लिखी इन दर्शन की लाइनों ने इन्हें एक नवीन रूप दे दिया है, जिस कारण ये किसी की भी नज़र से नहीं बच सकते।

सड़क के किनारे कुछ-कुछ मीटर के फासलों पर ये कूड़ेदान हैं और ये इसी रणनीति के तहत लगाए गए हैं, जिससे पर्यटक कूड़ा-करकट इधर उधर न फैलाएं। इन डिब्बों को लंढौर छावनी बोर्ड द्वारा स्थापित किया गया है और इन पर लिखे गए दार्शनिक उद्धरण बहुत अद्भुत हैं, जो कि किसी को भी पल-भर ठहरकर सोचने पर मजबूर कर सकते हैं।

इन कूड़ेदानों को इस तरह से लगाया गया है कि यहां पर घूमने वाले हर पर्यटक की नज़र इन डिब्बों पर पड़े और वे एक पल के लिए ही सही, आत्मनिरीक्षण के लिए मजबूर हो जाएं।

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इन्हीं कूड़ेदानों पर लिखी दर्शन की कुछ लाइनें, जो हमें बहुत पंसद आईं, कुछ यूं हैं-

सही दिशा में खो जाना अच्छा होता है।
हमें इन पहाड़ों पर नहीं, स्वयं पर विजय प्राप्त करनी है।
आप जितना शांत होंगे, उतना अधिक सुन पाएंगे।

इस सैर के दौरान खूबसूरत पहाड़ी नज़ारे और कूड़ेदानों पर लिखी दर्शन की लाइनों से मैं मंत्रमुग्ध हो गया। मुझे कहना होगा कि यह सैर मेरे लिए अब महज़ एक सैर भर ही नहीं रह गई थी, बल्कि इन पलों का हासिल कुछ गहरा ही था।

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