नज़फगढ़ की झील में अभी भी देख सकते हैं आप इन शीतकालीन प्रवासी पक्षियों को

आमतौर पर नज़फगढ़ झील के किनारे दिखने वाले प्रवासी पक्षी सिर्फ सर्दियों में नज़र आते हैं, लेकिन इस बार ये अभी तक यहां मौजूद हैं और आप इनका नज़ारा करने का आनंद ले सकते हैं।

घुमक्कड़ी
Najafgarh Jheel | You can still see these winter migratory birds in the lake of Najafgarh

सर्दियां कब की चली गईं, लेकिन सर्दियों के दौरान दूर देशों से आये प्रवासी पक्षी अभी तक भी हमारे साथ हैं!  चौंकिए मत! हम बात कर रहे हैं दिल्ली-एनसीआर की सबसे बड़ी झील, जो कि नजफगढ़ में है। यहां आज भी आप उन प्रवासी पक्षियों को देख सकते हैं, जो सर्दियों में आए थे। ये अलग बात है कि अब इनकी संख्या ज्यादा नहीं है, फिर भी छोटे-छोटे झुंडों में इन्हें देखा जा सकता है।

आजकल नजफगढ़ झील की निगरानी कर रहे एक पर्यावरणविद् टी. के. राय का कहना है कि नजफगढ़ झील पर शीतकाल के दौरान दूर-दूर से प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां आती हैं, लेकिन इस बार शीतकाल बीत जाने के बावजूद पक्षियों की पंद्रह से अधिक प्रजातियां यहां विहार कर रही हैं।

हालांकि वे छोटे-छोटे झुंडों में मौजूद हैं। यह एक अद्भुत नजारा है और अगर हम पर्यावरण के संबंध में बात करें तो यह बहुत शुभ संकेत है। झीलों के बाहरी हिस्से में प्रवासी पक्षियों की बड़े पैमाने पर प्रजातियां शामिल हैं, जैसे- ग्रेट कॉर्मोरेंट, पाइड एवोसेट, केंटिश फ्लोवर, लिटिल रिंगेड प्लोवर, लिटिल स्टिंट, टेमिन्क्स स्टेंट, ब्लैक टेल्ड गॉडविड, रफ, यूरेशियन कूट, कॉमन टील, ग्रेटर व्हाइट पेलिकन, रूडी शेल्डक, गडवाल, ब्लैक हेडेड गुल आदि।

राय आगे कहते हैं कि झील के बाहरी हिस्सों पर कुछ स्थानीय प्रजातियों के पक्षी भी हैं। इनमें पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक हेडेड आइबिस, इंडियन कॉर्मोरेट, ग्रेटर फ्लेमिंगो, लार्ज एग्रेट, लिटिल एग्रेट, इंडियन पांड हेरॉन,
ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, इंडियन स्पॉट बिल्ड डक और ग्रेटर पेंटेड स्निप शामिल हैं। पक्षियों के जीवन से भरी झील देखकर हम जैसे लोगों को बहुत राहत मिलती है।

टी. के. राय द्वारा साझा किए कुछ आंकड़ों के अनुसार, वेटलैंड्स इंटरनेशनल की सबसे बड़ी एशियाई वॉटरबर्ड जनगणना के मुताबिक यहां पर जलीय पक्षियों की 81 प्रजातियां हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियिम 1972 के तहत जलीय पक्षियों की कुल आबादी 27,673 हैस जिनमें साइबेरियाई आईयूसीएन रेड-लिस्टेड खतरे में आ चुकी प्रजातियां, सुदूर मध्य एशिया, उत्तरी एशिया, रूसी और प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं।

हालांकि एशियाई वॉटरबर्ड जनगणना के अनुसार, जलीय पक्षियों की कुल आबादी 10,592 के साथ जलीय पक्षियों की विविधता में कमी आई है, जो झीलों की खराब स्थिति को दर्शाता है।

दिल्ली के पक्षी निरीक्षक समुदाय और पर्यावरणविदों के अनुसार, गर्मियां झीलों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं और सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। झीलों के प्राकृतिक संसाधनों
का दुरुपयोग या अति प्रयोग, नियमित रूप से अवैध मछलियां पकड़ना, जल प्रदूषण, कृषि उद्देश्यों के लिए झीलों के सूखे हिस्सों का प्रयोग परिस्थितिकीय तंत्र को नष्ट कर रहा है। यह जलीय जैव विविधता आवास को भी कम कर रहा है, जिससे यह गर्मियों में सूख जाता है।

राय आगे कहते हैं कि आश्चर्यजनक रूप से इन गर्मियों में झील का जल स्तर अभी तक भी काफी अधिक है और इसकी परिधि भी जलमग्न हो गई है। झील पर मछली पकड़ने से भी भारी अशांति पैदा होती है। झील के व्यापक निजी भाग पर अभी भी सर्दियों के प्रवासी जल पक्षियों की पंद्रह प्रजातियां 43 डिग्री सेल्सियस तापमान में छोटे-छोटे झुंडों में निवास कर रही हैं।

उन्होंने आगे नजफगढ़ झील पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भूमिका पर जोर दिया। झीलों के संरक्षण और प्रबंधन 2017 के अनुसार, सरकार द्वारा नजफगढ़ झील की अधिसूचना के लिए इनटैक (आईएनटीएसीएच) की जनहित याचिका के संबंध में फरवरी, 2022 में एनजीटी के आदेश से झीलों के संरक्षण और रखरखाव को लेकर एक बड़ी उम्मीद थी, लेकिन सरकार द्वारा अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

नजफगढ़ झील की वर्तमान स्थिति के बारे में बात करते हुए राय कहते हैं कि नजफगढ़ झील दिल्ली-एनसीआर में दूसरी सबसे बड़ी झील है, जो आंशिक रूप से हरियाणा और आंशिक रूप से दिल्ली में स्थित है तथा दिल्ली में 5.84 वर्ग किमी. और हरियाणा में 4.46 वर्ग किमी. के कुल क्षेत्रफल का दावा करती है। जलीय पक्षी जैव विविधता के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है और झीलों के स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक भी है। वे मनुष्यों और पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

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